बहुराष्ट्रीय अमेरिकी कंपनी कॉग्निजेंट ने भारत में करीब 40 करोड़ रुपए की संभावित 'अनुचित पेमेंट' की पहचान की है। पहले इस अनुचित पेमेंट की राशि 33 करोड़ रुपए आंकी गई थी।
गौरतलब है कि काॅग्निजेंट पर भारत में बिल्डिंग लाइसेंस और परमिट वगैरा लेने के लिए गलत ढंग से पैसे देने का आरोप लगा था। इसके बाद कंपनी ने पिछले साल सितंबर में कहा था कि वह भारत में परमिट पाने और बिल्डिंग लाइसेंस लेने में हुए अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन की आंतरिक जांच करेगी। कंपनी इस बात की जांच कर रही है कि क्या भारत में उसने अमेरिका के फॉरन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट का उल्लंघन किया है?
फॉरन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट 1977 में बनाया गया वह कानून है जिसके तहत किसी अमेरिकी कंपनी के विदेशी धरती पर कारोबार करने के लिए घूस देना दंडनीय अपराध की श्रेणी आता है।
अगर ये साबित हो जाता है कि किसी कंपनी या उसके अधिकारी ने ऐसा कार्य किया है तो उस कंपनी और उसकी अधिकारियों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाया जा सकता है। साथ ही घूस के तौर पर दी गयी रकम को पेनाल्टी के साथ वसूला जा सकता है।
वहीं पूरे मामले में कॉग्निजेंट के सीएफओ केरन ने कहा कि जांच सही दिशा में जा रही है। कंपनी के स्वामित्व वाली भारतीय कंपनियों ने करीब 40 करोड़ रुपए का अनुचित पेमेंट किया है। यह हमारे पिछले अनुमान से करीब 7 करोड़ रुपये ज्यादा है।'