केंद्र सरकार विमानन कंपनी एयर इंडिया के कर्ज को कम करने और खरीदारों को लुभाने के लिए इसकी विनिवेश प्रक्रिया में देरी करने पर विचार कर रही है। वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय वाहक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया 27 जनवरी को शुरू की गई थी।
31 मार्च 2019 तक एयर इंडिया का कर्ज 58,255 करोड़ रुपये था। बाद में 2019 में, इस ऋण में से 29,464 करोड़ रुपये एयर इंडिया से एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (AIAHL) नामक सरकारी स्वामित्व वाले विशेष प्रयोजन वाहन में स्थानांतरित कर दिया गया था।
विनिवेश प्रक्रिया में देरी संभव
अब एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा है कि, 'सरकार कोविड-19 महामारी से प्रभावित मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए एयरलाइन के ऋण को और कम करने पर विचार कर रही है।' वहीं एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि बोली लगाने के लिए अधिक समय दिए जाने की संभावना है और इससे विनिवेश प्रक्रिया में और देरी होगी।
फिलहाल 30 अक्तूबर है आखिरी तारीख
कंपनियों द्वारा बोलियां प्रस्तुत करने की समय सीमा इस वर्ष पहले ही चार बार बढ़ाई जा चुकी है। 25 अगस्त को एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की समय सीमा दो महीने बढ़ाकर 30 अक्तूबर कर दी गई थी क्योंकि कोरोना वायरस ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बाधित कर दिया था।
अनिश्चित नजर आ रही है विनिवेश प्रक्रिया: क्रिसिल
मालूम हो कि मई में रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा था कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया काफी अनिश्चित नजर आ रही है। क्रिसिल ने कहा था कि इस महामारी की वजह से वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
वहीं नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिसंबर 2019 में कहा था कि कर्ज के तले दबी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया का निजीकरण हर हाल में होगा। इसके निजीकरण के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नहीं है। एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। इन हालातों में एयर इंडिया तेल कंपनियों को ईंधन का बकाया नहीं दे पा रही थी। तेल कंपनियों ने कंपनी को ईंधन सप्लाई रोकने की धमकी भी दी थी।