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BSNL के हाईटेक गुब्बारों से मिलेगा हाई स्पीड इंटरनेट, जानिए क्या है ये

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जब पिछले सप्ताह केंद्रीय संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से अपनी मुलाकात के दौरान इनफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने बीमार व घाटे में चल रही भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को पटरी पर लाने के लिए उनकी तारीफ की तो वह पल बीएसएनएल के लिए निश्चित रूप से गर्व करने वाला रहा होगा।
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लगभग 10 साल तक नवीनतम उपकरण खरीदने की पाबंदी झेलने के बाद अब बीएसएनएल गूगल के बैलूनों (गुब्बारों) की मदद से गांव-गांव तक अपने नेटवर्क को फैलाने में जुटी हैं।

बीएसएनएल को इस मुकाम तक ले जाने में पर्दे के पीछे से अपना योगदान देने वाले बीएसएनएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव अमर उजाला के राजीव कुमार के साथ बातचीत में बीएसएनएल में आए इस जबरदस्त बदलाव का श्रेय मोदी सरकार को देते हैं। पेश है बातचीत के मुख्य अंश।
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प्रश्न : गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा है कि वह अपनी लून परियोजना के लिए बीएसएनएल के साथ काम करने जा रहे हैं, यह लून परियोजना क्या है?

उत्तर: लून शब्द बैलून से निकला है और बैलून के जरिए ही देश के ग्रामीण भारत और उन दुर्गम इलाके जहां इंटरनेट को नहीं पहुंचाया जा सकता है, इंटरनेट पहुंचाया जाएगा। लून दुर्गम इलाके में 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ेगी। उस लून पर सोलर पैनल लगा होगा। नीचे धरती पर एंटीने लगे होंगे जिसके माध्यम से लून की तरफ से छोड़े गए स्पेक्ट्रम को ग्रहण किया जाएगा। इस काम में गूगल बीएसएनएल के साथ करार कर सकता है।

किसे होगा फायदा और कब होगा शुरू?

प्रश्न: लून इंटरनेट से देश के किन-किन राज्यों को फायदा होगा और यह कब तक शुरू होगा?

उत्तर: लून इंटरनेट का फायदा सभी पहाड़ी राज्य उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश को होगा वहीं कई दूरदराज के दुर्गम इलाके को भी इसका फायदा होने जा रहा है। अभी हम इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि लून को ऊपर भेजने, नीचे उतारने के दौरान क्या-क्या कठिनाई आती है या इससे कहीं हमारे रक्षा क्षेत्र को तो कोई नुकसान नहीं हो रहा है। पहले प्रायोगिक रूप से लून प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। फिर इसका व्यावसायिक संचालन होगा। आगामी फरवरी-मार्च से प्रायोगिक (पायलट) प्रोजेक्ट  शुरू हो सकता है। पिछले तीन-चार महीनों से गूगल कंपनी इस मामले में बीएसएनएल से बातचीत कर रही है।

प्रश्न: घाटे में चलने वाली बीएसएनएल कैसे पटरी पर आई और मुनाफे में चलने वाली कंपनी बन गई?

उत्तर: संक्षेप में बताएं तो 2002 से लेकर 2006 तक मोबाइल सेवा में बीएसएनएल नंबर एक रही। वर्ष 2006 से 2012 के दौरान बीएसएनएल में कोई भी आधुनिक उपकरण की खरीदारी नहीं कर सकी और उस समय ही टेलीकॉम कंपनियों के बीच असली प्रतिस्पर्धा चल रही थी। नतीजा यह हुआ कि वित्त वर्ष 2013-14 में बीएसएनएल को 691 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। लेकिन इसके बाद लागत व नेटवर्क में बढ़ोतरी एवं कर्मचारियों के सहयोग से वित्त वर्ष 2014-15 के सेवा राजस्व में 4.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान कंपनी का मुख्य कारोबार 27,242 करोड़ रुपये का रहा जो पिछले पांच सालों की तुलना में सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 2014-15 में हमारा संचालन मुनाफा 672 करोड़ रुपये हो गया। यह मुनाफा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बीएसएनएल कर्मचारियों के वेतन पर सालाना 15 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। बीएसएनएल में फिलहाल 2.25 लाख कर्मचारी है।
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ग्राहकों को क्या-क्या मिला?

प्रश्न: तो क्या कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम नहीं ला रहे है?

उत्तर: ऐसा सोचा गया था, लेकिन अभी यह मामला सरकार के पास लंबित है।

प्रश्न: अपने ग्राहकों के लिए आपने क्या-क्या किया है?

उत्तर: रात के नौ बजे से सुबह सात बजे तक लैंडलाइन और सीडीएमए ग्राहकों के लिए नाइट कॉलिंग को मुफ्त कर दिया गया है। बीएसएनएल के सभी ब्राडबैंड ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के 2 एमबीपीएस तक उन्नत किया गया है। सभी बीएसएनएल ग्राहकों के लिए इनकमिंग कॉल पर ऑल इंडिया रोमिंग मुक्त किया गया है। सभी महत्वपूर्ण पर्यटन व सार्वजनिक स्थानों पर वाई-फाई हॉट स्पॉट आरंभ किए गए हैं। इन सभी उपायों से लैंडलाइन डिस्कनेक्शन में कमी आई है।

प्रश्न: ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने को लेकर आपकी क्या योजना है?

उत्तर : भारत नेट-बीएसएनएल 70 हजार ग्राम पंचायतों के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की प्रक्रिया में है। इनमें से 26 हजार ग्राम पंचायतों को कवर कर दिया गया है। बीएसएनएल रक्षा नेटवर्क के लिए 54 हजार किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की प्रक्रिया में है।
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