घरेलू व निर्यात दोनों ही कारोबार में अहम भूमिका निभाने वाला एमएसएमई क्षेत्र (छोटे और मझोले उद्योग) इन दिनों कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। एमएसएमई की चुनौतियां, उनके निदान व अन्य कई मसलों पर अमर उजाला के संवाददाता राजीव कुमार ने केंद्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र से बात की। पेश हैं उनके अंश:
प्रश्न: आपकी नजर में छोटे उद्यमियों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर: लघु व मझोले उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्ज की है। उन्हें गिरवी मुक्त कर्ज नहीं मिल पाता है। उसके बाद बात भुगतान की आती है। छोटे उद्यमियों को लोन चुकतान के लिए कम समय मिलता है। समय की कमी रहती है, इसलिए उनके कर्ज को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) में बदलने की अधिक आशंका रहती है। एनपीए से कर्ज का बोझ हो जाता है और वह बढ़ता रहता है और जल्द ही ऐसी इकाइयां सिक (बीमार) घोषित हो जाती हैं। तो मेरी नजर में यह एक बड़ी चुनौती है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रश्न: छोटे उद्यमियों के लिए मार्केटिंग भी तो बड़ी समस्या है और उसके लिए आपका मंत्रालय क्या कर रहा है?
उत्तर: आप सही कह रहे हैं। मार्केटिंग की समस्या प्रमुख समस्याओं में से एक है। छोटे उद्यमियों को मार्केटिंग की समस्या रहती है। हमने प्रोक्यूरमेंट पॉलिसी के आधार पर सीपीएसयू (केंद्रीय सार्वजनिक कंपनी) के लिए छोटे व मझोले उद्योग से खरीदारी अनिवार्य किया है। इसके बावजूद मार्केटिंग की समस्या है। इनको दूर करने के लिए क्रेता-विक्रेता बैठक, वेंडर विकास कार्यक्रम व कई अन्य प्रकार के कार्यक्रम मंत्रालय की सहायता से आयोजित किए जा रहे हैं। एक बात और बता दूं कि बैंकों से इन उद्यमियों को कर्ज दिलाने के लिए हमने क्रेडिट गारंटी फंड बनाया है और हम इन इकाइयों की थर्ड पार्टी से रेटिंग का काम कराते हैं ताकि बैंक उन्हें लोन दे सके और इस काम में मंत्रालय की तरफ से आर्थिक मदद दी जाती है।
प्रश्न: प्रदूषण की वजह से भी कई छोटी इकाइयों पर खतरा मंडराने लगा है। कुछ को तो बंद करने तक का नोटिस जारी कर दिया गया है?
उत्तर: हां, प्रदूषण की चुनौती सबसे नई प्रकार की चुनौती है। यह सही है कि कई पेपर मिल को पर्यावरण बोर्ड की तरफ से प्लांट बंद करने का नोटिस मिला है। असल में पोल्यूशन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने में खर्च काफी होता है जो छोटी इकाइयों के वश में नहीं है और अभी कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति नहीं बन पाई है। हमने कहा है कि सामूहिक रूप से मिलकर ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं और पर्यावरण विभाग से सहयोग करे।
प्रश्न: आप उत्तर प्रदेश से हैं तो उत्तर प्रदेश में एमएसएमई मंत्रालय की तरफ से कोई नया प्रयास कर रहे है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश के लिए भी काफी कुछ किया जा रहा है। एमएसएमई क्लस्टर का निर्माण किया जा रहा है कई जगहों पर। जगह की पहचान कर ली गई है।
प्रश्र: खादी पर आपका विशेष जोर है, कुछ खास वजह?
उत्तर: ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिले। खादी का उत्पादन बढ़े औऱ खादी लोगों के बीच प्रचलित हो सके। अधिक से अधिक लोग खादी पहन सके।
प्रश्न: अभी चीन में आर्थिक सुस्ती है तो क्या इसका असर एमएसएमई पर दिखेगा?
उत्तर: भारतीय अर्थव्यवस्था और उसका विकास मुख्य रूप से घरेलू मांग से प्रेरित है, निर्यात में वृद्धि से नहीं। कई एशियाई देशों की तुलना में भारत से चीन को निर्यात अपेक्षाकृत कम हैं। इसके अलावा, भारत का निर्यात समूह विविधीकृत है, जिसमें सेवाओं की बड़ी संख्या है। इसीलिए, चीन की मंदी का भारत पर प्रत्यक्ष असर पड़ने की कम संभावना है। हालांकि विश्व अर्थव्यवस्था बहुत मजबूती से एकीकृत है और इसलिए कुछ अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकते हैं।
प्रश्न: एसएमई एक्सचेंज ने काम करना आरंभ नहीं किया है। इसमें तेजी लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
उत्तर: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एसएमई एक्सचेंज प्लेटफार्म आरंभ किया है। उद्यमियों और विभिन्न अंतर्मध्यस्थों के बीच जागरूकता लाने के लिए बीएसई एमएसई प्लेटफार्म ने बीएसई के एसएमई प्लेटफार्म पर लिस्टिंग के लाभ के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न संस्थाओं जैसे सेबी, फिक्की, सीआईआई, आईसीएआई, आईसीएसआई, डीएंडबी, आईएमसी, आईएसएमई, मीडिया हाउसेस और विभिन्न अन्य स्थानीय औद्योगिक निकायों के समन्वय में सामूहिक और आमने-सामने की बैठकों और लगभग 400 एसएमई कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इस निरंतर अंतर्क्रिया के कारण एसएमई प्लेटफार्म ने काफी सफलता हासिल की है।
प्रश्न: प्रधानमंत्री मोदी के स्टेंड अप इंडिया स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम को आप किस प्रकार आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं?
उत्तर: 18 अगस्त, 2015 को वित्त मंत्री द्वारा इंडिया एस्प्रेशन फंड (आईएएफ) और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए मेकिंग इंडिया सॉफ्ट लोन फंड (स्माइल) जैसी निधियां आरंभ की गई हैं। इन स्कीमों का उद्देश्य क्वासी इक्विटी की प्रकृति का रियायती ब्याज पर ऋण और एमएसएमई को अपेक्षाकृत रियायती शर्तों पर सावधी ऋण प्रदान करना है ताकि वे एमएसएमई की स्थापना के लिए अपेक्षित ऋण-इक्विटी अनुपात को पूरा कर सकें और मौजूदा एमएसएमई के लिए विकास के अवसरों का उपयोग भी कर सकें।