कंपनियां और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) फर्म अब अपने नाम में ‘नेशनल’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने इस बारे में अध्यादेश (सर्कुलर) जारी कर कंपनियों के नाम से जुड़े और भी कई नए नियम बनाए हैं।
मंत्रालय ने यह कदम नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लि.(एनएसईएल) में करीब 5,600 करोड़ रुपये के भुगतान संबंधी घोटाला सामने आने के बाद उठाया है।
मंत्रालय की ओर से जारी सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि कंपनियों के नाम में ‘बैंक’, ‘स्टॉक एक्सचेंज’ और ‘एक्सचेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी संबंधित क्षेत्र के नियामकों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) हासिल करने के बाद ही किया जा सकेगा।
‘नेशनल’ शब्द के इस्तेमाल के बारे में अध्यादेश में स्पष्ट किया गया है कि निजी कंपनियां अब ‘नेशनल’ शब्द को शामिल करते हुए अपने नाम का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) नहीं करा सकेंगी। नाम में ‘नेशनल’ के इस्तेमाल की इजाजत केवल सरकारी कंपनियों को या ऐसी कंपनियों को ही होगी जिनमें केंद्र या राज्य सरकार की हिस्सेदारी हो।
मंत्रालय की ओर से यह अध्यादेश देश के सभी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) को भेज दिए गए हैं। उनसे कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में इस नियम का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
सर्कुलर के मुताबिक नाम में ‘बैंक’ शब्द को शामिल करने के लिए अब कंपनियों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। इसी तरह ‘स्टॉक एक्सचेंज’ और ‘एक्सचेंज’ जैसे शब्दों को जोड़ कर नाम रजिस्टर करवाने के लिए उन्हें बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से एनओसी लेना होगा।
नए नियमों के अनुसार कंपनियों के नाम में शब्द संक्षेपणों (एब्रीविएशन) या शॉर्ट फार्म का इस्तेमाल अब सरकारी कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों के नाम में नहीं किया जा सकेगा। मंत्रालय के इस सर्कुलर के अमल में आने से अब सरकारी कंपनियों से मिलते-जुलते नाम रख कर लोगों को कंपनी में निवेश के लिए रिझाने के फर्जीवाड़े पर रोक लगने की उम्मीद है।