सार्वजनिक क्षेत्र की एकमात्र विमानन कंपनी एयर इंडिया के सीएमडी अश्विनी लोहानी ने खुला पत्र लिखकर कहा कि, 'एक एयरलाइन होने के नाते हम एक प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करते हैं। हमारे प्रतियोगी प्रक्रियाओं और प्रतिबंधों से विवश नहीं हैं। हम आर्थिक रूप से और साथ ही परिचालन में बाधा से सामना करते हैं।'
गुरुवार को कतर एयरवेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि सरकारी हवाई कंपनी एयर इंडिया में बोली लगाने में किसी तरह की कोई रुचि नहीं है। इससे बढ़िया वो इंडिगो एयरलाइंस में हिस्सेदारी खरीदने को ज्यादा बढ़िया ऑफर मानते हैं।
केंद्र सरकार एयर इंडिया को बेचने के लिए लंदन और सिंगापुर में रोड शो का आयोजन करने वाली है, ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। कतर एयरवेज के सीईओ अकबर अल बाकर ने कहा कि इंडिगो में हिस्सेदारी खरीदने का यह सही वक्त नहीं है, क्योंकि कंपनी के प्रमोटरों में गतिरोध चल रहा है।
एयर इंडिया पर है 58 हजार करोड़ का कर्ज
एयर इंडिया पर फिलहाल लगभग 58,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा सरकारी विमानन कंपनी का परिचालन घाटे में बना हुआ है।
तेल कंपनियों का 5,000 करोड़ रुपये बकाया
अगस्त में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कहा था कि एयर इंडिया का बकाया ईंधन बिल 5,000 करोड़ रुपये हो गया था, जिसका लगभग भुगतान नहीं किया गया था।
जेआरडी टाटा ने की थी शुरुआत
जेआरडी टाटा ने एयर इंडिया की 1932 में शुरुआत की थी। पिछले साल जब सरकार ने एयर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां मंगवाई थीं, तब भी टाटा समूह द्वारा इसको खरीदने की बात उठी थी। हालांकि तब समूह इसको खरीदने से पीछे हट गया था।