दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस ( RCom ) की संपत्ति खरीदने को लेकर सौंपी गई अपनी बोली वापस ले ली है। दरअसल एयरटेल ने कर्जदाताओं की समिति के व्यवहार पर सवाल उठाया है। साथ ही एयरटेल ने रिलायंस जियो के आग्रह पर बोली जमा कराने की समय सीमा बढ़ाने के समिति के कदम को पूरी तरह अनुचित और पक्षपात वाला करार दिया है।
एयरटेल के वित्त डायरेक्टर हरजीत कोहली ने पत्र लिखकर कहा कि एयरटेल ने जब समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया तो आर कॉम के कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने खारिज कर दिया था। लेकिन बाद में फिर एक कंपनी को प्रक्रिया में शामिल करने के लिये बोली लगाने की समय सीमा बढ़ा दी गई।
रिलायंस जियो ने संपत्ति बिक्री सौदे को लेकर समय सीमा 10 दिन बढ़ाने का आग्रह किया था। बाद में सीओसी ने समय सीमा 10 दिन बढ़ा दी थी और बोली 25 नवंबर को खोलने का फैसला किया।
बता दें कि रिलायंस कम्युनिकेशंस की संपत्तियों के लिए भारती एयरटेल, भारती इंफ्राटेल और निजी इक्विटी कंपनी वार्दे पार्टनर्स ने बोलियां जमा की थी। आरकॉम के स्पेक्ट्रम की खरीद को लेकर एयरटेल ने बोली जमा की थी। वहीं भारती इंफ्राटेल द्वारा मोबाइल टावर के लिए बोली जमा की गई थी।
31 मार्च 2019 तक आरकॉम पर करीब 35,600 करोड़ रुपये का कर्ज था। आरकॉम की कुल देनदारियों में 23,327 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क और 4,987 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क शामिल है। आरकॉम और उसकी अनुषंगियों ने 1,210 करोड़ रुपये के ब्याज और 458 करोड़ रुपये के विदेशी विनिमय उतार-चढ़ाव के लिए प्रावधान नहीं किया है।
शुक्रवार को जारी तिमाही नतीजों के अनुसार कंपनी को 30 हजार करोड़ से अधिक का घाटा हुआ था। यह कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा घाटा है। कर्ज चुकाने के लिए कंपनी अपनी संपत्तियों को बेच रही है। इसके बाद शनिवार को अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।