एयर इंडिया के प्रमुख कैंपबेल विल्सन ने गुरुवार को बताया कि 2025 में उनके हवाई यातायात में ज्यादातर वृद्धि घरेलू और कम दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से होगी, क्योंकि उसके बेड़े में और अधिक संकीर्ण बॉडी वाले विमान शामिल हो रहे हैं, साथ ही अगले साल पुरानी चौड़ी बॉडी वाले विमानों को भी बदला जाएगा।
विल्सन, दो साल से अधिक समय से एयर इंडिया के प्रमुख हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि एयरलाइन समूह की घरेलू बाजार में हिस्सेदारी लगभग 29 प्रतिशत है और मेट्रो से मेट्रो मार्गों पर विमानन कंपनी की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि शीर्ष 120 घरेलू मार्गों पर हमारी बाजार हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। उनके अनुसार, पुराने वाइड-बॉडी विमानों का नवीनीकरण 2025 की शुरुआत में शुरू होगा।
विल्सन ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि अब तक 787 और 777 विमानों का नवीनीकरण कार्य शुरू हो जाएगा। दुर्भाग्य से, कुछ क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं अब भी पटरी पर लौट रही हैं और विशेष रूप से सीटें एक चुनौती हैं। एयर इंडिया के सीईओ के अनुसार जब 2025 में इसका (रेट्रोफिट) काम शुरू हो जाएगा, तब हम हर महीने 3-4 विमान संचालन में लाएंगे, जब तक कि 40 वाइड-बॉडी विमानों का पूरा सेट तैयार नहीं हो जाता।"
टाटा समूह ने अपने एयरलाइन व्यवसाय को मजबूत करने की योजना के तहत एयर इंडिया के साथ विस्तारा का विलय कर लिया है। एआईएक्स कनेक्ट को भी एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ एकीकृत कर दिया गया है। एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक ने कहा कि सभी 50 व्हाइट टेल विमानों को हासिल करने में देरी हो रही है, जिनके पूर्व में इस वर्ष दिसंबर तक बेड़े में शामिल होने की उम्मीद थी। कुल 50 व्हाइट टेल बोइंग 737 मैक्स विमानों में से कम से कम 35 विमान बेड़े में शामिल हो गए हैं। इन विमानों का संचालन एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से किया जा रहा है।
विल्सन ने हाल ही में हुई हड़ताल सहित बोइंग में समस्याओं के कारण होने वाली देरी के बारे में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, "50 व्हाइट टेल वाले विमान, इस वर्ष दिसंबर तक आने वाले थे... अब वे अगले वर्ष जून तक आएंगे और इसका एयरलाइन के संचालन पर थोड़ा प्रभाव पड़ेगा।" उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट नहीं है कि इसका प्रभाव कितने समय तक रहेगा। कुछ विमानों के लिए छह महीने का समय उचित है।" सामान्यतः, व्हाइट टेल वाले विमान वे होते हैं जो मूलतः किसी विशेष एयरलाइन के लिए निर्मित किए जाते हैं और बाद में उसे कोई और एयरलाइन अन्य एयरलाइन की ले लिए जाते हैं।