सार्वजनिक क्षेत्र की एकमात्र विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण का कर्मचारी संघों ने विरोध करने का फैसला लिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्मचारियों को उनके वेतन और पेंशन के भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर अभी भी स्पष्टता नहीं है।
बैठक में लिया यह फैसला
बुधवार को मुंबई में विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों की बैठक में यह फैसला लिया। इसके अनुसार, सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (आईटीएफ) को निजीकरण के खिलाफ पत्र लिखा जाएगा। इनमें पायलट, चालक दल के सदस्य, इंजीनियर और ग्राउंड स्टाफ समेत अन्य का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन शामिल हैं।
बता दें कि सरकार घाटे में चल रही एयर इंडिया के प्रस्तावित विनिवेश के लिए अंतिम रूपरेखा पर काम कर रही है।
एयर इंडिया पर है 58 हजार करोड़ का कर्ज
एयर इंडिया पर फिलहाल लगभग 58,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा सरकारी विमानन कंपनी का परिचालन घाटे में बना हुआ है।
तेल कंपनियों का 5,000 करोड़ रुपये बकाया
अगस्त में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कहा था कि एयर इंडिया का बकाया ईंधन बिल 5,000 करोड़ रुपये हो गया था, जिसका लगभग भुगतान नहीं किया गया था।
टाटा समूह ने दिखाई थी एयर इंडिया को खरीदने में रुचि
इस बीच यह भी खबर आई थी कि टाटा समूह, जिसने 87 साल पहले एयर इंडिया की नींव रखी थी, वो फिर से इसको सरकार से खरीद सकती है। टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन में इस बारे में इशारा किया था हालांकि नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने और बोली लगाने से पहले वो पहले सरकार के नियमों के बारे पूरी जानकारी लेंगे।
जेआरडी टाटा ने की थी शुरुआत
जेआरडी टाटा ने एयर इंडिया की 1932 में शुरुआत की थी। पिछले साल जब सरकार ने एयर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां मंगवाई थीं, तब भी टाटा समूह द्वारा इसको खरीदने की बात उठी थी। हालांकि तब समूह इसको खरीदने से पीछे हट गया था।