जयंत सिन्हा ने कहा कि एयर इंडिया को बेचने का पूरा प्रोसेस सितंबर तक पूरा हो जाएगा। उससे पहले ही सरकार इसके कर्मचारियों के लिए पूरी तरह फायदेमंद एक प्लान तैयार किया है। इसके तहत कर्मचारियों को वीआरएस, कंपनी के शेयरों में हिस्सेदारी, रिटायर हो चुके कर्मचारियों को सरकारी खर्चे पर स्वास्थ्य बीमा और पुराने कर्जे का सेटलमेंट शामिल है।
इन संगठनों से सरकार कर रही है बात
डिसइन्वेस्टमेंट प्रोसेस शुरू होने के साथ ही कंपनी विभिन्न कर्मचारी संगठनों से बात शुरू कर रही है। इनमें पायलेट यूनियन, केबिन क्रू यूनियन और इंजीनियर्स यूनियन शामिल हैं। इनसे बातचीत पूरी होने के सरकार यह निर्णय लेगी। हो सकता है कि सरकार कर्मचारियों पर होने वाले खर्चे को पूरी तरह से वहन कर सके।
शेयरों में मिलेगी 24 फीसदी हिस्सेदारी
कर्मचारियों को 24 फीसदी शेयरों में हिस्सेदारी मिलेगी, जो कि सरकार के पास बिकने के बाद बची रहेगी। इससे कर्मचारियों को भी यह लगेगा कि कंपनी उनकी है और वो आगे चलकर भी इसमें सही ढंग से काम करेंगे।
अभी हैं 11 हजार कर्मचारी
एयर इंडिया में फिलहाल 11 हजार से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें से 37.6 फीसदी कर्मचारी अगले 5 सालों में रिटायर हो जाएंगे। इसके साथ ही सरकार कर्मचारियों का पहले से बकाया 1298 करोड़ रुपये भी एयर इंडिया के बिकने से पहले एरियर के तौर पर भुगतान कर देगी।