कानपुर शेल कंपनियों का गढ़ है। नोटबंदी के बाद यह बात पुख्ता भी हुई। खातों में भारी-भरकम रकम जमा होने के बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने यहां की करीब 400 कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। आरओसी के सूत्र बताते हैं शहर में इतनी ही फर्जी कंपनियां विभाग के राडार पर हैं। यूपी और उत्तराखंड में प्रतिबंधित छह हजार कंपनियों में से 5,200 यूपी की हैं। इनमें से चार सौ कानपुर की हैं।
ये होती हैं बोगस कंपनियां
बोगस कंपनियां प्राय: कागजों पर चलती हैं। ये पैसे का भौतिक लेन-देन नहीं करतीं, लेकिन मनी लांड्रिंग का आसान जरिया बनती हैं। इन्हें मुखौटा या फर्जी कंपनियां भी कहते हैं। इनका अस्तित्व केवल कागजों पर होता है। इनका कोई आधिकारिक कारोबार भी नहीं होता।
ये कंपनियां न्यूनतम पेडअप कैपिटल के साथ काम करती हैं। डिविडेंड इनकम जीरो होता है। टर्नओवर और ऑपरेटिंग इनकम भी बहुत कम होता है। कहा जाता है कि काले धन को सफेद करने के लिए बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है।