केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक जौहरी ने कहा कि जीएसटी वसूली बढ़ाने के लिए बिना रसीद लाखों रुपये का सामान बेचने वाले दुकानदारों से जीएसटी का काफी नुकसान हो रहा है। उन्हें भी जीएसटी के दायरे में लाने की जरूरत है।
बिजनेस-टु-बिजनेस (बी2बी) दुकानों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिनकी रोजाना बिक्री लाखों में है, लेकिन वे रसीद नहीं दे रहे हैं और नकद में कारोबार कर रहे हैं, ऐसे बी2बी व्यवसाय चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जिन्हें सीबीआईसी की ओर से पहचान करना बाकी है। ऐसे क्षेत्र में जो व्यापारी नकदी में सामान बेचकर रसीद नहीं देते हैं, उससे जीएसटी का नुकसान हो रहा है। हमें उनसे चर्चा करनी होगी। हम इस व्यवहार को कैसे बदल सकते हैं, इस पर भी मंथन चल रहा है। इसे बदलने की जरूरत है क्योंकि यह देश और समाज दोनों के हित में नहीं है।
उपभोक्ता का हौसला बढ़ाने की जरूरत
चेयरमैन ने एक उदाहरण देकर कहा, वैट को लेकर कुछ राज्यों में एक प्रयोग हुआ था। अगर आप बिल का भुगतान करते हैं तो हम उस बिल के आधार पर लॉटरी निकालेंगे ताकि वे आगे आकर बिल की मांग करें। उसी तरह, हम करदाताओं की सेवाओं के जरिये समाधान का प्रयास कर रहे हैं।
संभावित करदाताओं की मिलेगी जानकारी
चेयरमैन ने कहा कि वाणिज्यिक संपत्तियों का आधार देखें और विशेष रूप से बड़े शहरों में तो पता चलता है कि अमुक पते पर कुछ व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं। अगर उस पते को पैन डाटाबेस से सत्यापित करते हैं तो पता चलता है कि वह आयकर में पंजीकृत है। अगर डाटाबेस को फिल्टर कर देखें तो एक अनुमान लगाया जा सकता है कि भविष्य में हमारे संभावित करदाता कौन हैं, जो जीएसटी के दायरे में शामिल नहीं हुए हैं।
1.50 लाख करोड़ रुपये का मासिक जीएसटी संग्रह अब सामान्य
जौहरी ने कहा कि 1.50 लाख करोड़ रुपये की मासिक जीएसटी वसूली अब सामान्य बात हो गई है। बोर्ड को इस बात का भरोसा है कि आने वाले वर्षों में मासिक जीएसटी संग्रह 1.50 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा। जनवरी, 2023 में जीएसटी के जरिये सरकार को 1,55,922 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी।
चालू वित्त वर्ष में ऐसा तीसरी बार हुआ, जब संग्रह 1.50 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। साथ ही, यह अप्रैल, 2022 के बाद दूसरा सर्वाधिक संग्रह रहा। चेयरमैन ने कहा कि जीएसटी संग्रह बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि आयकर रिटर्न फाइलिंग और अनुपालन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केंद्र और राज्य सरकारें दोनों इस दिशा में मिलकर काम कर रही हैं।