कंपनियों की अपनी रणनीति और तौर-तरीके में बदलाव करने की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कार्यशक्ति में इस पीढ़ी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में कंपनियों को अपनी टैलेंट रणनीतियों, कार्यसंस्कृति और कर्मचारी जुड़ाव के तरीकों में तेजी से बदलाव लाने की जरूरत है। रैंडस्टैड डिजिटल इंडिया के प्रबंध निदेश मिलिंद शाह ने कहा कि भारतीय जेन जी का 'फुल-टाइम जॉब के साथ साइड हसल' यानी फुल-टाइम नौकरी के साथ-साथ अतिरिक्त काम को प्राथमिकता देना। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को अब ऐसी संस्कृति बनानी होगी, जो तकनीकी दक्षता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों को साथ लेकर चले। जो कंपनियां इस संतुलन को अपनाएंगी, वे अगली पीढ़ी के शीर्ष तकनीकी प्रतिभाओं को हासिल करेंगी।
जेन-जी के बीच लोकप्रिय है एआई
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 82% जेन-जी कार्यस्थल पर एआई के इस्तेमाल को लेकर उत्साहित हैं, और 83% पहले से ही समस्या-समाधान के लिए एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, 44 फीसदी युवाओं ने एआई के कारण भविष्य में नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता भी जताई है, जो पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक है। सीखने की आदतों में भी बदलाव दिख रहा है, 52% जेन जी कर्मचारी एआई टूल्स के जरिए खुद को अपस्किल कर रहे हैं, साथ ही ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और पीयर लर्निंग को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
पिछली पीढ़ियों से विपरित है जेन-जी की सोच
जेन-जी पिछली पीढ़ियों की तरह 'लंबी नौकरी अवधि' पर नहीं, बल्कि ऐसे नियोक्ताओं पर भरोसा करती है जो उनके विकास में निवेश करें और संतुलित जीवन की उनकी जरूरत का सम्मान करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलाव चुनौती नहीं, बल्कि संगठनों के लिए खुद को विकसित करने का अवसर है।