मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन मामले में गिरफ्तार यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर 11 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं। उनसे हुई पूछताछ में कई नए खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राणा कपूर परिवार के सदस्यों की करीब 25 मुखौटा कंपनियों का पता चला है। इनमें कई कंपनियों पर अप्रत्यक्ष रूप से राणा की पत्नी और बेटियों का वर्चस्व बताया जा रहा है।
बाकी कंपनियों में भी कथित तौर पर उनके परिवार के दूसरे सदस्यों का हस्तक्षेप है। जांच में बहुत जल्द यह भी खुलासा हो सकता है कि मुखौटा कंपनियों में कथित तौर पर किन भारतीय राजनेताओं की हिस्सेदारी है। ईडी जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि विदेश में कपूर परिवार की चल-अचल संपत्ति कहां-कहां पर है। संपत्ति खरीदने के लिए किस मुखौटा कंपनी का इस्तेमाल किया गया है।
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर को ईडी ने रविवार की सुबह गिरफ्तार किया था। उसके बाद अदालत ने उन्हें 11 मार्च तक ईडी की हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे। जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि कपूर और उनके परिवार के कई सदस्यों ने अपने पद का दुरुपयोग कर बैंक को चूना लगाया है। इस मामले में यस बैंक के संस्थापक की पत्नी और तीन बेटियां भी शामिल बताई जा रही हैं।
ईडी ने कपूर के आवास और दफ्तरों पर छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। राणा कपूर की पत्नी बिंदु तथा तीनों बेटियों के आवास एवं प्रतिष्ठानों की तलाशी ली गई है। इस दौरान पता चला है कि राणा परिवार ने मुखौटा कंपनियों की मदद से करीब 2200 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
मुखौटा कंपनियां खोलने के लिए परिवार के सदस्यों के अलावा बैंक के कई भरोसेमंद अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। कथित रिश्वत देने या रुपयों की हेराफेरी करने जैसे सभी काम इन्हीं मुखौटा कंपनियां की आड़ में होते थे। कपूर परिवार के पास 44 महंगी पेंटिंग भी मिली हैं। इनमें से कई पेंटिंग तो ऐसी हैं, जिन्हें कथित तौर पर राजनेताओं से खरीदा गया है।
सूत्रों के अनुसार, बैंक घोटाले में यह बहुत छोटा सा मामला है। जांच में पता चला है कि कई राजनेताओं ने मुखौटा कंपनियां स्थापित कर खूब पैसा कमाया है। आरोप है कि कपूर ने डीएचएफएल के प्रवर्तक कपिल वाधवन के साथ आपराधिक षड्यंत्र कर यस बैंक को चूना लगाया और डीएचएफएल को वित्तीय सहायता मुहैया करा दी।
यहां पर भी मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इस मदद के बदले राणा परिवार को अनुचित लाभ दिया गया है। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यह घोटाला अप्रैल और जून 2018 में शुरू हुआ था। उस दौरान यस बैंक ने डीएचएफएल के अल्पकालिक ऋण पत्रों में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
माना जा रहा है कि इसी निवेश के बदले वाधवन ने कथित रूप से राणा परिवार को 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का फायदा पहुंचाया। हालांकि यह फायदा डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को कर्ज के रूप में पैसा देकर हासिल किया गया है।