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Year Ender 2020: कभी लगा लोअर सर्किट, तो कभी तोड़ा रिकॉर्ड, 2020 में बाजार में जारी रही उठा-पटक

Thu, 31 Dec 2020 04:58 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Year Ender 2020: बाजार में जारी रही उठा-पटक - फोटो : pixabay
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शेयर बाजारों के लिए यह साल काफी घटनाक्रमों वाला रहा। मार्च 2020 में भारत में कोरोना वायरस महामारी ने दस्तक दी। कोरोना वायरस से शेयर बाजार भी अछूता नहीं रहा। घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। मार्च में जहां शेयर बाजार धड़ाम हुआ था, वहीं अब साल के अंत में सेंसेक्स-निफ्टी ने 2020 में हुए पूरे नुकसान की भरपाई कर ली है। 

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बाजार में जारी रही उठा-पटक
देश में जैसे-जैसे जानलेवा कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ती गई, वैसे ही घरेलू बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और गिरावट के कारण बाजार में लोअर सर्किट लगा। यानी 45 मिनट के लिए कारोबार बंद कर दिया गया था। कोरोना के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कई कदम उठाए, जिसके बाद शेयर बाजार ने उड़ान भरी और सेंसेक्स-निफ्टी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे। सेंसेक्स ने पहली बार 47000 और निफ्टी ने 14000 का आंकड़ा पार किया।

2020 की खास बातें:
  • सेंसेक्स को 41,000 से 42,000 के स्तर तक पहुंचने में आठ महीने लगे। 
  • वहीं सूचकांक ने 44,000 से 45,000 का आंकड़ा सिर्फ 11 दिनों में पूरा कर लिया। 
  • 26 जून को 35,000 पर पहुंचने के बाद 113 कारोबारी सत्रों में यह 45,000 तक पहुंचा। 
  • साल 2018 से दिसंबर की शुरुआत तक बीएसई का बाजार पूंजीकरण 19 लाख करोड़ रुपये बढ़ा और रिकॉर्ड 179 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 
  • इस दौरान विदेशी फंडों ने इक्विटीज में 1.9 लाख करोड़ रुपये डाले।
  • जनवरी 2018 से अब तक सबसे ज्यादा मुनाफे में टेक कंपनियां रहीं। सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आईटी में 83 फीसदी और एनर्जी में 41 फीसदी की बढ़त आई।
  • वहीं यूटिलिटी, टेलीकॉम और मेटल में क्रमश: 21 फीसदी, 25 फीसदी और 29 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
31 फीसदी चढ़ा स्मॉलकैप सूचकांक
कोरोना वायरस महामारी के बीच इस साल छोटे शेयरों ने जोरदार वापसी की है और निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। पिछले दो साल के दौरान छोटी कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को नकारात्मक रिटर्न या प्रतिफल दिया था। महामारी के दौरान खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है जिससे स्मॉलकैप सूचकांक इस साल 31 फीसदी चढ़ गया। स्मॉलकैप का प्रदर्शन व्यापक बाजार से बेहतर रहा है। 
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स्मॉलकैप और मिडकैप रहे शेयर बाजार की पसंद
कभी ऊपर और कभी नीचे रहने वाले बाजार के बीच स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर बाजार की पसंद रहे। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (ब्रोकिंग एवं वितरण) के प्रमुख और इक्विटी रणनीतिकार हेमांग जानी ने कहा कि, 'मार्च में गिरावट के समय कई मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर लार्जकैप की तुलना में आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध थे। मूल्यांकन और तरलता की बेहतर स्थिति की वजह से मिडकैप और स्मॉल कैप शेयर ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। इसके अलावा पिछले छह से आठ महीनों के दौरान खुदरा भागीदारी में कई गुना का इजाफा हुआ है, जिससे इन शेयरों को फायदा हुआ है।' 

सालभर के आंकड़े
कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष और बुनियादी शोध प्रमुख रुस्मिक ओझा ने कहा कि इस साल मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक के बेहतर प्रदर्शन की वजह यह रही कि पिछले दो कैलेंडर वर्षों में इनका प्रदर्शन खराब रहा था। इस साल 24 मार्च को मिडकैप सूचकांक अपने एक साल के निचले स्तर 9,555.24 अंक पर आ गया। वहीं 17 दिसंबर को यह 52 सप्ताह के उच्चस्तर 18,017.56 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह स्मॉलकैप सूचकांक 24 मार्च को अपने सर्वकालिक निचले स्तर 8,622.24 अंक पर आ गया। 29 दिसंबर को यह 18,089.16 अंक के अपने एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं बीएसई सेंसेक्स 24 मार्च को एक साल के निचले स्तर 25,638.9 अंक पर था। जबकि 30 दिसंबर को सेंसेक्स 47,807.85 अंक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
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