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Year Ender 2020: अर्थव्यवस्था में सुधार व ग्राहकों के लिए RBI ने उठाए ये कदम

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sat, 19 Dec 2020 03:16 PM IST
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Year Ender 2020: - फोटो : pixabay

साल 2020 को खत्म होने में कुछ ही दिन शेष हैं। इस साल कोरोना वायरस महामारी के चलते ना सिर्फ भारत, बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सभी जरूरी कदम उठाए। नकदी संकट से जूझ रहे ग्राहकों की आवश्यकता अनुसार आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 2020 में कई महत्वपूर्ण एलान किए।

10 वर्षों के निचले स्तर पर बॉन्ड प्रतिफल
फिक्की की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने कहा था कि जीडीपी के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप का संकेत मिलता है।पिछले एक दशक में यह पहला मौका है जब उधारी लागत इतनी कम हुई है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक नकदी की उपलब्धता से सरकार की उधारी लागत बेहद कम बनी हुई है और इस समय बॉन्ड प्रतिफल पिछले 10 वर्षों के निचले स्तर पर हैं।



आइए जानते हैं इस साल आर्थिक वृद्धि के लिए आरबीआई ने क्या कदम उठाए-

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Year Ender 2020: - फोटो : pixabay
साल 2020 को खत्म होने में कुछ ही दिन शेष हैं। इस साल कोरोना वायरस महामारी के चलते ना सिर्फ भारत, बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सभी जरूरी कदम उठाए। नकदी संकट से जूझ रहे ग्राहकों की आवश्यकता अनुसार आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 2020 में कई महत्वपूर्ण एलान किए।

10 वर्षों के निचले स्तर पर बॉन्ड प्रतिफल
फिक्की की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने कहा था कि जीडीपी के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप का संकेत मिलता है।पिछले एक दशक में यह पहला मौका है जब उधारी लागत इतनी कम हुई है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक नकदी की उपलब्धता से सरकार की उधारी लागत बेहद कम बनी हुई है और इस समय बॉन्ड प्रतिफल पिछले 10 वर्षों के निचले स्तर पर हैं।

आइए जानते हैं इस साल आर्थिक वृद्धि के लिए आरबीआई ने क्या कदम उठाए-

लोन मोरेटोरियम की सुविधा
वैसे तो आर्थिक सुधार के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा कई कदम उठाए गए, लेकिन उनमें से सबसे प्रमुख है लोन मोरेटोरियम की सुविधा। आरबीआई महामारी के समय में ग्राहकों को लोन मोरेटोरियम की सुविधा दी। आरबीआई द्वारा दी गई लोन मोरेटोरियम की सुविधा के तहत ग्राहकों को ईएमआई टालने का विकल्प मिला। यानी अगर आपने बैंक से किसी भी प्रकार का लोन लिया है, तो आरबीआई ने आपको अपनी जरूरत के अनुसार, छह माह तक के लिए लोन की ईएमआई का भुगतान नहीं करने का विकल्प दिया।

कब से शुरू हुआ था मोरेटोरियम?
केंद्रीय बैंक की ओर से ग्राहकों को छह महीने के लिए- मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई और अगस्त के लिए अपने लोन की ईएमआई टालने का विकल्प दिया गया। 

रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया वन टाइम लोन रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम लेकर आया है। बैंक भी चाह रहे थे कि लोन रिस्ट्रक्चर करने की अनुमति मिले। इसके तहत अब बैंक अपने ग्रोहकों के लोन का रीपेमेंट शेड्यूल बदल सकते हैं। इसके तहत वे लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं या पेमेंट हॉलीडे भी दे सकते हैं।

क्या है लोन मोरेटोरियम और रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम में अंतर?
लोन मोरेटोरियम के तहत किस्तें न चुकाने की छूट दी गई थी। इस दौरान ब्याज आपके मूल धन में जोड़ा गया। वहीं रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम में बैंकों को ज्यादा अधिकार मिले। बैंक तय कर सकेंगे कि ईएमआई को घटाना है, लोन की अवधि बढ़ानी है, सिर्फ ब्याज वसूलना है, या ब्याज दर एड्जस्ट करनी है।

सोने के बदले 90 फीसदी तक कर्ज
भारतीय रिजर्व बैंक ने गोल्ड लोन को और भी आकर्षक बनाया। बैंकों को गोल्ड ज्वैलरी पर 90 फीसदी तक लोन देने की अनुमति मिली। पहले सोने के कुल मूल्य का 75 फीसदी तक ही लोन मिलता था। यह सुविधा 31 मार्च 2021 तक दी गई है।

मालूम हो कि कोरोना वायरस महामारी के समय में लोगों ने गोल्ड लोन का काफी इस्तेमाल किया है। इसके मद्देनजर आरबीआई ने यह फैसला किया। गोल्ड लोन में गोल्ड ज्वैलरी को बतौर जमानत रखवाकर कर्ज दिया जाता है। इतना ही नहीं, गोल्ड की बढ़ती कीमतों की वजह से लोग अधिक राशि के लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे। 

गोल्ड लोन कर्जदाताओं की आमदनी और कमाई बढ़ाने के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है। इसके साथ ही कर्ज लेने वालों के लिए भी यह लाभदायक होता है क्योंकि पर्सनल लोन की तुलना में गोल्ड लोन की ब्याज दर कम होती है।

इसकी एक और खास बात ये है कि गोल्ड लोन का लाभ उठाने के लिए आपको अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री रखने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी है, तो आपको सस्ती दरों पर लोन मिल सकता है। इतना ही नहीं, गोल्ड लोन में आपको आसान रीपेमेंट विकल्प भी मिलते हैं। इसमें आंशिक रीपेमेंट भी उपलब्ध है।

24 घंटों के लिए शुरू हुई RTGS की सुविधा
आरबीआई ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए आरबीआई ने करोड़ों ग्राहकों के लिए एक और बड़ी घोषणा की। रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सिस्टम चौबीसों घंटे के लिए उपलब्ध हुआ।यानी अब ग्राहकों को बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए बैंक के खुलने और बंद होने का इंतजार नहीं करना होता है।

पहले ग्राहकों के लिए आरटीजीएस सिस्टम की टाइमिंग सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक थी। दूसरे और चौथे शनिवार को, जब बैंक की छुट्टी होती है, तब यह सुविधा भी बंद रहती थी। इसके साथ ही रविवार को भी यह सर्विस बंद रहती थी। 

दो लाख रुपये है न्यूनतम सीमा
आरबीआई ने देश भर में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। कोरोना काल में डिजिटल बैंकिंग का उपयोग बढ़ गया है। आपको बता दें कि आरटीजीएस के तहत न्यूनतम ट्रांसफर अमाउंट दो लाख रुपये है। वहीं अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है।

क्या है RTGS?
RTGS का मतलब है रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम। 'रियल टाइम' का मतलब है तुरंत। मतलब जैसे ही आप पैसा ट्रांसफर करें, कुछ ही देर में वह खाते में पहुंच जाए। आरटीजीएस के जरिए जब आप लेनदेन करते हैं तो दूसरे खाते में तुरंत पैसा ट्रांसफर हो जाता है।

डिजिटल बैंकिंग के लिए किया प्रेरित
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने लोगों को डिजिटल बैंकिंग के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि डिजिटल भुगतान चैनलों की सुरक्षा में सुधार होगा और उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधा भी बेहतर होगी। इन दिशानिर्देशों में उत्कृष्ट कंपनी संचालन की आवश्यकताएं तथा इंटरनेट एवं मोबाइल बैंकिंग, कार्ड से भुगतान आदि जैसे माध्यमों के आम सुरक्षा नियंत्रणों पर कुछ न्यूनतम मानकों के क्रियान्वयन व निगरानी की व्यवस्थाएं होंगी। 

डिजिटल बैंकिंग में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने एचडीएफसी बैंक के ऊपर कार्रवाई भी की। रिजर्व बैंक ने बैंकिंग प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण बैंक में पिछले दो साल के दौरान सेवाओं में व्यवधान की कई घटनाएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की है। दास ने कहा था कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की डिजिटल बैंकिंग सेवाओं में आए व्यवधान को लेकर भी नियामक अध्ययन कर रहा है।

रियल एस्टेट क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए भी उठाए कदम
आरबीआई ने आवास ऋण को बढ़ावा देने के लिए घोषित उपायों को अमल में लाने की पहल की। इसके तहत कर्ज-मूल्य अनुपात (एलटीवी) यानी मूल्य के अनुपात में दिए जाने वाले आवास ऋण के लिए जोखिम भारांश को युक्तिसंगत बनाया गया। 

ग्राहकों को कम ब्याज पर मिल सकेगा कर्ज
मालूम हो कि यह नई व्यवस्था 31 मार्च 2022 तक मंजूर किए जाने वाले सभी आवास ऋण पर लागू होगी। इससे एक तरफ जहां बैंकों के पास रियल एस्टेट क्षेत्र को कर्ज देने के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध होगी, वहीं वे ग्राहकों को लाभ देने के लिए ब्याज भी कम कर सकेंगे। 

रियल एस्टेट क्षेत्र में कर्ज को मिलेगी गति
आरबीआई की इस संबंध में जारी अधिसूना के अनुसार जहां मकान के मूल्य के समक्ष कर्ज यानी एलटीवी 80 फीसदी से कम है तो नए आवास ऋण पर जोखिम भारांश 35 फीसदी होगा। वहीं एलटीवी 80 फीसदी से अधिक है लेकिन 90 फीसदी से कम है तो जोखिम भारांश 50 फीसदी होगा। आरबीआई ने कहा कि इस उपाय से रियल एस्टेट क्षेत्र में बैंक कर्ज को गति मिलने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में रोजगार सृजन तथा दूसरे उद्योगों के जुड़े होने को देखते हुए यह आर्थिक पुनरुद्धार के लिए महत्वपूर्ण है। 

20,000 करोड़ रुपये के विशेष ओएमओ की घोषणा
अगस्त में भारतीय रिजर्व बैंक ने मुक्त बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की साथ-साथ खरीद और बिक्री आयोजित करने की घोषणा की थी। इसके तहत दो चरणों में कुल 20,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री की गई। केंद्रीय बैंक ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा था कि 10 और 17 सितंबर को 10,000 करोड़ के दो ओपन मार्केट ऑपरेशन का आयोजन किया जाएगा। 

क्या है ओएमओ?
ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत केंद्रीय बैंक सरकारी सेक्योरिटी और ट्रेजरी बिल की खरीद और बिक्री करते हैं। भारत में यह काम आरबीआई करता है। आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन करता है।
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