इन सेक्टर में आई भीषण मंदी
सीएमआईई के एमडी और सीईओ महेश व्यास के मुताबिक देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। इसमें भी शहरी इलाकों में लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही हैं। ऑटो सहित कई सेक्टर में हालत बिगड़ने से भी यह असर देखने को मिल रहा है। टेक्सटाइल, चाय, एफएमसीजी, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में भीषण मंदी आई है।
सीएमआईई ने जो डाटा जारी किया था, उसके मुताबिक 2016 से 2018 के बीच 1.1 करोड़ लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। फरवरी 2019 में बेरोजगारी का आंकड़ा 7.2 फीसदी पर पहुंच गया। वहीं पिछले साल फरवरी में यह आंकड़ा 5.9 फीसदी था।
लोगों की नौकरी छूटी
रिपोर्ट के मुताबिक जहां पिछले साल 40.6 करोड़ लोग नौकरी कर रहे थे, वहीं इस साल फरवरी में यह आंकड़ा केवल 40 करोड़ रह गया। इस हिसाब से 2018 और 2019 के बीच करीब 60 लाख लोग बेरोजगार हो गए।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ी संख्या
इसी साल मई में जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारों की संख्या 7.8 फीसदी रही, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह 5.3 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि नोटबंदी के चलते नई नौकरियों की संख्या में काफी गिरावट आ गई थी, जो अभी संभली नहीं है।
युवा बेरोजगारी दर में कमी
युवा बेरोजगारी दर में भी कमी आई है। 15-29 साल के युवा जो देश की कुल आबादी में एक तिहाई हैं, उनकी बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च तिमाही में गिरकर 22.5 फीसदी रही। वहीं अक्तूबर-दिसंबर (2018) तिमाही की बात करें तो यह दर 23.7 फीसदी थी। बेरोजगारी को लेकर ये रिपोर्ट 'करेंट वीकली स्टेटस' को आधार मानकर तैयार की गई है, जिसके तहत किसी भी शख्स को उस हफ्ते में बेरोजगार माना जाता है, जिस सप्ताह में वह एक घंटे के लिए भी काम नहीं करता या फिर उसको काम नहीं मिलता है।
इन सेक्टर पर भी पड़ा असर
ऑटो इंडस्ट्री और एविएशन सेक्टर में कई लोगों को नौकरी से निकाला जा चुका है। ऑटो के साथ ही चाय, बिस्किट, कताई जैसे उद्योग में भी लोगों की नौकरियां जा सकती हैं, जिससे बेरोजगारी और बढ़ने की संभावना है। चाय उद्योग से भी 10 लाख कर्मचारी बाहर हो सकते हैं, क्योंकि लागत के मुकाबले बिक्री मूल्य काफी कम हो गया है। बिस्किट बनाने वाली कंपनी पारले-जी ने भी कहा था कि उसके यहां से 10 हजार लोगों को निकाला जा सकता है।