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WTO: 'भारत को डब्ल्यूटीओ की सुधार प्रक्रिया में लीडर की भूमिका निभानी चाहिए', बोले डब्ल्यूटीओ प्रमुख नगोजी

Fri, 14 Nov 2025 06:23 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

WTO: वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत को डब्ल्यूटीओ की सुधार प्रक्रिया में शामिल होकर नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभानी चाहिए। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रमुख नगोजी ओकोंजो-इवेला ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होने आगे क्या कहा, आइए जानते हैं, विस्तार से।
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डब्लूटीओ - फोटो : डब्लूटीओ.ऑर्गेनाइजेशन
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विस्तार
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वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत को डब्ल्यूटीओ की सुधार प्रक्रिया में नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।  भारत की अर्थव्यवस्था स्वस्थ गति से बढ़ रही है और यह प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अग्रणी है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रमुख नगोजी ओकोंजो-इवेला ने शुक्रवार को यह बात कही। नगोजी ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन में उन क्षेत्रों पर गौर करने की जरूरत है जो काम नहीं कर रहे हैं और उन्हें सुधारने के तरीकों पर चर्चा करने की जरूरत है।

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विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला ने विशाखापत्तनम में सीआईआई के साझेदारी शिखर सम्मेलन 2025 में कहा, ‘‘ भारत अग्रणी हो सकता है, भारत को डब्ल्यूटीओ की सुधार प्रक्रिया में अग्रणी होना चाहिए। भारत को यह सुनिश्चित करने में अग्रणी होना चाहिए कि हम ऐसी प्रणाली में न रहें जो नियम आधारित होने के बजाय अधिक शक्ति आधारित हो।’’ उन्होंने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उसके पास न केवल इस क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने के लिए पर्याप्त पैमाना और विश्वसनीयता है।

अमेरिका के ऊंटे टैरिफ का जिक्र करते हुए डब्ल्यूटीओ प्रमुख ने कहा कि सदस्य देशों को अमेरिका की ओर से उठाई गई चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने भी सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अतीत की शिकायतों को दोहराने से मजबूत वैश्विक व्यापार प्रणाली बनाने में मदद नहीं मिलेगी। डब्ल्यूटीओ प्रमुख ने विश्व व्यापार संगठन के सभी सदस्यों से वैश्विक व्यापार प्रणाली को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
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अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन की शाखाओं के काम करने के तरीके पर चिंता जताई है और विवाद निवारण तंत्र सहित विश्व व्यापार संगठन में सुधार की मांग की है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) 166 सदस्यों वाला जिनेवा स्थित एक बहुपक्षीय निकाय है जो व्यापार संबंधी मुद्दों से निपटता है। भारत 1995 से इसका सदस्य है। डब्ल्यूटीओ ने यह भी कहा कि किसी देश को अपनी वृद्धि को बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन "आपको आगे बढ़ने के लिए बहुपक्षीय प्रणाली की भी आवश्यकता होती है।" उन्होंने कहा, "यही कारण है कि विश्व व्यापार संगठन महत्वपूर्ण है।" उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में विश्व वैश्विक व्यापार में भारी व्यवधानों का सामना कर रहा है।

नगोजी ने कहा, "मेरा आपके लिए संदेश यह है कि इसके बावजूद, वैश्विक व्यापार प्रणाली लचीली बनी हुई है।" उन्होंने आगे कहा कि 72 प्रतिशत विश्व व्यापार अभी भी विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत हो रहा है, जो स्थिरता और पूर्वानुमानशीलता को साबित करता है।

उन्होंने कहा कि सुधारों पर मिलकर काम करने की आवश्यकता है, "इस कार्य के लिए बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और विश्व व्यापार संगठन में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है।" इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा एकतरफा टैरिफ वृद्धि नाटकीय है, लेकिन टैरिफ बाधाओं, गैर-टैरिफ मुद्दों, प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और कुछ देशों द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं के बारे में "हमें उनकी बात सुननी चाहिए"।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हमें उनकी शिकायतों पर ध्यान देने की जरूरत है, (अन्यथा) हम उनकी देखभाल करने का अवसर खो देंगे।" डब्ल्यूटीओ प्रमुख ने कहा कि अमेरिका के अलावा भारत जैसे विकासशील देशों ने भी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताएं भी अवसर प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा, "मैं इसके (वैश्विक व्यवधानों के) बारे में असहज और चिंतित महसूस कर रही हूं... लेकिन वैश्विक व्यापार प्रणाली अभी भी डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार काम कर रही है।" उन्होंने आगे कहा कि देशों को अमेरिका या चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता से विविधता लानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के इस विविधीकरण में भारत एक बड़ा लाभार्थी है।

ई-कॉमर्स पर रोक के मुद्दे पर उन्होंने आशा व्यक्त की कि अगले वर्ष मार्च में होने वाले 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। मुक्त व्यापार समझौतों के बारे में नगोजी ने कहा, "हमें मुक्त व्यापार समझौतों से कोई समस्या नहीं है।" उन्होंने कहा कि हालांकि यह दो सदस्यों या दो समूहों के बीच है, फिर भी नियम पूरी तरह से डब्ल्यूटीओ पर आधारित हैं। उन्होंने आगे कहा, "हम इन्हें किसी खतरे के रूप में नहीं देखते हैं, और असल में हम इनके साथ सहमत हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि सदस्यों को अपने व्यापार में विविधता लाने की आवश्यकता है।"

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