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महंगाई का डबल अटैक: थोक मुद्रास्फीति अगस्त में 9.92 फीसदी पर पहुंची, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों से चिंता

Mon, 14 Sep 2026 01:00 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगस्त में थोक मूल्य-आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई। खाद्य, ईंधन, और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ी। पश्चिम एशिया युद्ध और मानसून की स्थिति ने भी असर डाला।
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WPI Inflation - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में थोक मूल्य-आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई है। यह जुलाई में दर्ज 9.78 फीसदी की तुलना में अधिक है। खाद्य वस्तुओं, विनिर्मित उत्पादों, और ईंधन व बिजली की बढ़ती कीमतों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने थोक मूल्य सूचकांक आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न समूहों में महंगाई के प्रमुख कारक सामने आए हैं। खनिज तेल, खाद्य वस्तुएं, और खाद्य उत्पादों का विनिर्माण इसमें शामिल हैं। मूल धातुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं, और रसायन व रासायनिक उत्पादों के विनिर्माण ने भी थोक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति को बढ़ाया। यह सूचकांक इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

किन क्षेत्रों में बढ़ी महंगाई?

अगस्त में खाद्य सूचकांक में मुद्रास्फीति बढ़कर 7.05 फीसदी हो गई। यह जुलाई में 6.65 फीसदी थी। विनिर्मित वस्तुओं में थोक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 8.37 फीसदी के श्रृंखला के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। जुलाई में यह 8.29 फीसदी थी। ईंधन और बिजली समूह में थोक मूल्य सूचकांक-आधारित मुद्रास्फीति 22.93 फीसदी दर्ज की गई। इन प्रमुख क्षेत्रों में कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है।

महंगाई के पीछे वैश्विक कारक क्या हैं?

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की लागत बढ़ाई है। भारत में अधिकांश कच्चा तेल इसी जलडमरूमध्य से आयात किया जाता है। वैश्विक कच्चे तेल के साथ-साथ उर्वरक की लागत में भी वृद्धि हुई है। इन बढ़ती लागतों का व्यापक प्रभाव खाद्य कीमतों पर भी पड़ा है। इन वैश्विक घटनाओं ने देश में महंगाई के दबाव को बढ़ाया है।

भारतीय रिजर्व बैंक का रुख क्या है?

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले महीने बेंचमार्क नीति दरों को अपरिवर्तित रखा था। नीति दरें 5.25 फीसदी पर स्थिर बनी हुई हैं। समिति ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 5 फीसदी लगाया है। इस अनुमान के पीछे अपर्याप्त और असमान दक्षिण-पश्चिम मानसून तथा अल नीनो की स्थिति को मुख्य कारण बताया गया है।

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