देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर गहराता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत दर्ज की गई थी। खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं तथा ईंधन और बिजली की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण थोक महंगाई में यह उछाल आया है। इस बीच, विपक्ष ने महंगाई के आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और घटती मजदूरी के साथ बढ़ती कीमतों पर सवाल उठाए हैं।
सरकारी डेटा के मुताबिक, अगस्त महीने में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में थोक कीमतों में तेजी दर्ज की गई है:
चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से ही थोक मूल्य सूचकांक में लगातार वृद्धि का रुझान देखा जा रहा है। इसके पीछे वैश्विक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं:
कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के साथ-साथ आम जनता की कमाई में आ रही गिरावट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
बढ़ती कीमतों और घटती मजदूरी के इस दोहरे प्रभाव के कारण देश के करोड़ों परिवारों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
थोक महंगाई के इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार के दावों पर तीखा हमला बोला। जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कहते रहते हैं कि 'सब चंगा सी' (सब ठीक है), लेकिन वास्तविक धरातल पर स्थिति यह है कि 'सब महंगा सी' (सब कुछ महंगा है)। उन्होंने रेखांकित किया कि चार महीनों से 10% के करीब बनी थोक महंगाई आम लोगों के जीवन को कठिन बना रही है।
रमेश ने लिखा, "अभी जारी हुए आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि लगातार चार महीनों से थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई करीब 10% के आसपास बनी हुई है। सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मुश्किलें और बढ़ाने वाली बात यह है कि सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई के हिसाब से एडजस्ट की गई मजदूरी में भी लगातार गिरावट आ रही है और अप्रैल से अब तक इसमें 5.7% की कमी आई है। ग्रामीण भारत में इसमें भारी 9% की गिरावट दर्ज की गई है। यहाँ तक कि अगर महंगाई के असर को छोड़ दे, तब भी ग्रामीण मजदूरी घटी है।"