थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दिसंबर में आठ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। इसकी वजह ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होना रहा है। नवंबर में थोक महंगाई 4.64 प्रतिशत थी जबकि एक साल पहले दिसंबर, 2017 में यह 3.58 प्रतिशत रही थी। यह लगातार दूसरा महीना है जब थोक महंगाई दर नीचे आई है।
खाद्य वस्तुओं में पिछले महीने के मुकाबले आलू दिसंबर में सस्ता हुआ और इसकी थोक महंगाई दर 48.68 प्रतिशत रही, जो नवंबर में 86.45 प्रतिशत थी। हालांकि, प्याज कीमतों में दिसंबर में उछाल दिखा और इसकी थोक महंगाई दर 63.83 प्रतिशत पहुंच गई जो नवंबर में 47.60 प्रतिशत थी। इस दौरान दालों की महंगाई दर 2.11 प्रतिशत और अंडा, मांस व मछली की दर 4.55 प्रतिशत रही।
आंकड़ों के अनुसार, निर्मित वस्तुओं की थोक महंगाई दर में भी दिसंबर में गिरावट आई और यह 3.59 फीसदी रही जो नवंबर में 4.21 फीसदी थी। हालांकि, इस दौरान फलों के थोक दाम बढ़ गए। इसकी महंगाई दर 3.69 फीसदी हो गई जो नवंबर में 2.49 फीसदी थी।
उद्योग संगठन एसोचैम का कहना है कि थोक महंगाई दर में आई बड़ी गिरावट से इस माह होने वाली एमपीसी बैठक में आरबीआई ब्याज दरें घटा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होने से भी आरबीआई को फैसला लेने में आसानी होगी जिससे औद्योगिक वृद्घि तेज करने और निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी।