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Indian Economy: बीत चुका देश की अर्थव्यवस्था का 'सबसे खराब दौर', अब तीसरी तिमाही में 6.2% वृद्धि का अनुमान

Wed, 26 Feb 2025 08:07 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।

सार

Indian Economy: जर्मनी की ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे खराब दौर अब बीत चुका है और दिसंबर तिमाही में जीडीपी 6.2% तक रहने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रिजर्व बैंक अप्रैल में ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है, ताकि अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर पड़े।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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जर्मनी की एक ब्रोकरेज फर्म ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में सबसे खराब दौर अब समाप्त हो गया है। डॉयचे बैंक की रिपोर्ट में कहा गया कि सितंबर तिमाही में 5.4 फीसदी की वृद्धि थी, जो पिछली सात तिमाहियों में सबसे कम थी। इसके बाद दिसंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि 6.2 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। 

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डॉयचे बैंक के विश्लेष्कों ने कहा, हम मानते हैं कि भारत के आर्थिक विकास की दिशा में सबसे खराब दौर अब समाप्त हो चुका है। लेकिन गति में सुधार के बावजूद वित्तीय वर्ष 2026 में समग्र जीडीपी सात फीसदी से कम रह सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल ही में जारी होने वाले आधिकारिक आर्थिक आकंड़ों से पहले हमें भविष्यवाणियों को लेकर सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि पिछले वर्षों के आंकड़ों में बदलाव हो सकता है। 

ब्रोकरेज फर्म ने यह भी बताया कि 65 उच्च-आवृत्ति संकेतकों से मिले अग्रिम संकेतक भी 6.2 फीसदी की वृद्धि की ओर इशारा कर रहे हैं। रिजर्व बैंक अप्रैल में अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान वृद्धि दर को बढ़ाने के लिए 25 आधार अंकों की एक और ब्याज दर में कटौती कर सकता है। 
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछली नीति की बैठक के मिनट्स से पता चला कि मौद्रिक नीति समिति के सभी छह सदस्यों ने महसूस किया कि ब्याज दरें अभी भी उच्च स्तर पर हैं। अप्रैल में ब्याज दरों में कटौती के बाद रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि 0.50 फीसदी की रेपो दर कटौती का असर सीधे अर्थव्यवस्था पर पड़े, इस पर वह अधिक फोकस करेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस मौजूदा चक्र में ब्याज दरों में और कटौती की संभावना नहीं है। केंद्रीय बैंक पहले से ही तरलता (लिक्विडिटी) की जरूरत से अवगत है।
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