शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है। इस बाजार में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. साल 2021 में कुल डीमैट खातों की संख्या 8 करोड़ थी। दिसंबर 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 18.50 करोड़ पर पहुंच गया। इस तरह कोरोना काल के बाद डीमैट खाते खुलने की रफ्तार तेजी बढ़ी है। इन बढ़े हुए खातों में महिलाओं की संख्या 25 फीसदी है। खास बात यह है कि महिलाएं शेयर बाजार में ज्यादा समझदारी के साथ निवेश कर रही हैं।
इंट्राडे में समझ से काम ले रहीं महिलाएं
मार्केट रेगुलेटर सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक इंट्राडे ट्रेडिंग में नुकसान उठाने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। हर 10 में से 7 निवेशक को नुकसान हो रहा है, वहीं इंट्राडे ट्रेडिंग में महिलाओं की हिस्सेदारी कम हो रही है। मतलब साफ है इंट्राडे ट्रेडिंग के मामले में महिलाएं ज्यादा समझदार से काम ले रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले हर 10 में से 7 निवेशकों को नुकसान हुआ। वहीं वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2022-23 में इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाली महिलाओं का हिस्सा 4 फीसद कम हो गया। जहां 2018-19 में इस तरह के ट्रेडर्स में 20 फीसद महिलाएं थीं, वहीं 2022-23 में ये आंकड़ा घटकर 16 फीसद हो गया।
महिलाओं ने कमाया ज्यादा मुनाफा
इसी तरह मुनाफा कमाने वाले निवेशकों में महिला ट्रेडर्स पुरुष ट्रेडर्स की तुलना में कहीं ज्यादा थीं। वित्त वर्ष 2022-23 में सालाना 1 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाले पुरुष ट्रेडर्स को जहां 38,570 रुपए का औसत नुकसान हुआ, वहीं महिला ट्रेडर्स के मामले में औसत नुकसान 22,153 रुपए था। यानी महिला ट्रेडर्स का औसत नुकसान पुरुषों की तुलना में कम था। इस तरह महिलाएं शेयर बाजार में पुरुषों की तुलना में ज्यादा समझदारी के साथ निवेश कर रही हैं।
निवेश में महिलाओं की भागीदारी
● शेयर बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 18-25% है. (एनएसई, सेबी रिपोर्ट)
● शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में महिलाओं की संख्या तीन साल में 185% बढ़ी (ग्रो रिपोर्ट, 2023)
● महिला निवेशकों का बड़ा हिस्सा टियर 2 और टियर 3 शहरों से
● महिला निवेशक शेयर ट्रेडिंग की बजाए म्यूचुअल फंड में अधिक निवेश
● पांच वर्षों में एसआईपी निवेश में 20% की वृद्धि
● म्यूचुअल फंड निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 24%