भारत की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी विप्रो का समेकित शुद्ध मुनाफा मार्च तिमाही के दौरान 25.9 प्रतिशत बढ़कर 3,569.6 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,834.6 करोड़ रुपये था।
वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही (Q4) में कंपनी का राजस्व 22,504.2 करोड़ रुपये रहा। इसमें वित्तीय वर्ष 2024 की चौथी तिमाही के 22,208.3 करोड़ रुपये की तुलना में 1.33 प्रतिशत की मामूली इजाफा हुआ है। क्रमिक आधार पर कंपनी के लाभ और राजस्व में क्रमशः 6.43 प्रतिशत और 0.83 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का मुनाफा 18.9 प्रतिशत बढ़कर 13,135.4 करोड़ रुपये हो गया। पूरे वित्त वर्ष के लिए राजस्व 0.74 प्रतिशत घटकर 89,088.4 करोड़ रुपये रह गया।
वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में बेंगलुरु मुख्यालय वाली कंपनी को आईटी सेवा कारोबार से अपना राजस्व 2,505 मिलियन अमरीकी डॉलर से 2,557 मिलियन अमरीकी डॉलर के बीच रहने की उम्मीद है। क्रमिक आधार पर स्थिर मुद्रा के संदर्भ में इसमें 1.5 से 3.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।
विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक श्रीनि पल्लिया ने कहा, "चूंकि ग्राहक व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के कारण सतर्क बने हुए हैं, इसलिए हम निरंतर और लाभप्रद वृद्धि के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए उनके साथ घनिष्ठ साझेदारी करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 को दो बड़े सौदों, बड़ी डील बुकिंग में वृद्धि और शीर्ष खातों में वृद्धि के साथ समाप्त किया। उन्होंने कहा, "ग्राहक संतुष्टि स्कोर में सुधार हुआ है, जो मजबूत कार्यान्वयन और सहभागिता को दर्शाता है।"
विप्रो ने वैश्विक प्रतिभा में निवेश करना और परामर्श व एआई क्षमताओं को मजबूत करना जारी रखा है। विप्रो के कर्मचारियों की संख्या बीते वित्तीय वर्ष में 2,33,346 रही, जबकि इससे पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2,32,614 थी। बुधवार को बीएसई पर विप्रो के शेयर 1.4 फीसदी की मजबूती के साथ 247.50 रुपये के भाव पर बंद हुए। विप्रो के नतीजे बाजार बंद होने के बाद जारी किए।