फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tariff: क्या ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने की धमकी भारत की चिंता और बढ़ाएगी? विशेषज्ञों से जानें इसका क्या है मतलब

Tue, 06 Jan 2026 02:01 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

इस साल की शुरुआत वैश्विक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता के साथ हुई है। अमेरिका की वेनेजुएला में कार्रवाई और भारत को रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी से चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के निर्यात पर पहले से ही अमेरिका में ऊंचा आयात शुल्क लागू है, जिससे भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ है। 
विज्ञापन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : Google Gemini
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

साल 2026 की शुरुआत पिछले साल की तर्ज पर शुरू हुई है, जहां अमेरिका ने वेनेजुएला पर आक्रमण कर वैश्विक तनाव को और बढ़ा दिया है। वहीं 5 जनवरी 2026 को ट्रंप ने भारत को टैरिफ बढ़ाने की धमकी यह कहते हुए दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो भारत पर टैरिफ बढ़ाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है, यह भारत के लिए यह स्थिति चिंता पैदा करती है। क्योंकि भारत के निर्यात पर पहले से 50 प्रतिशत का आयात शुल्क यानी अमेरिकी टैरिफ लगता है। इसकी वजह से अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में गिरावट देखी गई है। जीटीआरआई द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार मई से नवंबर 2025 के बीच अमेरिका को भारतीय निर्यात 20.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसमें कहा गया है कि अगर टैरिफ में और वृद्धि होती है तो मंदी और गहरी होने की संभावना है।

संभावित टैरिफ धमकी अनिश्चितता को बढ़ाता है

जियोजित इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार कहते हैं, साल 2026 की शुरुआत बड़े भूराजनीतिक डेवलपमेंट के साथ हुई है, जिसके बहुत गहरे नतीजे हो सकते हैं। वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई से ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स और अस्थिर हो सकती है। हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि चीजें कैसे आगे बढ़ती हैं।

विज्ञापन


एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर कहते हैं, कुछ कहना भारत द्वारा रूसी तेल की लगातार खरीद से जुड़े भारतीय निर्यात पर संभावित टैरिफ वृद्धि वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सवाधानी की एक परत को जोड़ता है, जो रिस्क लेने की क्षमता को बढ़ाएगी। मिराए एसेट इंवेस्टमेंट के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वरूप मोहंती कहते हैं कि मुझे लगता है कि जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अपना बर्ताव बदल रही है, तो बाकी दुनिया भी वैसा ही करेगी। हर असर पर ध्यान देना होगा क्योंकि टैरिफ के बाद अब दुनिया बदल गई है।

ये भी पढ़ें: Budget 2026: क्या वित्त मंत्री सीतारमण चावल निर्यातकों को बजट में देंगी राहत? आईआरईएफ ने रखी ये मांगें

ट्रंप भारत पर टैरिफ दबाव क्यों बना रहे हैं?

विशेषज्ञों और जीटीआरआई की रिपोर्ट का कहना है, अमेरिकी कांग्रेस में दबाव और बढ़ रहा है, जहां सीनेटर लिंडसे ग्राहम एक ऐसा विधेयक पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत अगर मॉस्को 50 दिनों के अंदर यूक्रेन में युद्धविराम नहीं करता है, तो रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दूसरा टैरिफ शुल्क लगाया जाएगा। जिससे रूस की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और युद्ध विराम होने की संभवना बढ़ जाएगी।  इससे पहले भी अमेरिका द्वारा बड़ी तेल और एनर्जी कंपनियों पर रूसी तेल खरीदने को लेकर प्रतिबंद्ध लगाए गए हैं। इसमें अक्टूबर में रूस की ऊर्जा कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज और कई सरकारी कंपनियों ने रूस से तेल खरीदाना बंद कर दिया है। हालांकि आयात पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है।

विज्ञापन


बाजार विशेषज्ञ किशोर ओतस्वाल कहते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार वर्ता में ट्रंप अपनी शर्तों को मनवान चाहते हैं, जिसमें वे भारत के कृषि और डेयरी उद्योग को खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन भारत लगातार अपने हितों को रखकर बात कर रहा है।

नए मुक्त व्यापार समझौतों से टैरिफ का असर कम करने में सहायक

बाजार विशेषज्ञों का कहना कि साल 2025 में भारत ने यूके, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इसमें न्यूजीलैंड के साथ 100 प्रतिशत निर्यात को शून्य किया गया है और अगले 15 में  20 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश करने की योजना है। ओमान के साथ सीईपीए (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता) समझौता करने के बाद भारत खाड़ी क्षेत्र में अपनी आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगा और भारतीय निर्यात के लिए इन देशों में निर्यात करने पर शून्य शुल्क लगेगा। इससे सेवा क्षेत्र, छोटे उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे।

 इसके अलावा यूके के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। इसमें दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 में 120 डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसमें भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में कमी और यूके से आने वाली लग्जरी और कार पर शुल्क में बड़ी कटौती शामिल है। साथ ही भारतीय संगठनों के लिए सामाजिक लाभ सुरक्षा और उद्यम में भी मदद की मांग भी इसमे की गई है। नए बाजारों में भारत की बढ़ती उपस्थिति, अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत के टैरिफ के बोझ को कम किया है। निर्यातकों, कारोबारियों को नए बाजार में कई तरह की छूट और सुविधाएं मिलने की वजह से भारत का निर्यात भविष्य में तेजी से बढ़ेगा। हालांकि अमेरिका का बाजार काफी बड़ा है और भारत इसे खोना नहीं चाहता है, इसलिए व्यापार व्यापार वार्ता चल रही है। लेकिन ट्रंप किस करवट बैठते हैं यह देखना होगा।

विज्ञापन



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें