वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही तक तांबे (कॉपर) की कीमतों में तेजी का रुझान जारी रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की लगातार चुनौतियों, नई खदानों की सीमित क्षमता और प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों में मांग में सुधार के चलते यह स्थिति देखने को मिल सकती है।
केडिया एडवाइजरी के संस्थापक और निदेशक अजय सुरेश केडिया ने कहा कि 2025 में अब तक तांबा करीब 40 फीसदी चढ़ चुका है। उनके मुताबिक, तांबा के लिए हालात अभी भी मजबूत बने हुए हैं। एलएमई पर कीमतें 13,500 डॉलर प्रति टन तक जा सकती हैं, जबकि घरेलू बाजार में 2026 की पहली छमाही में भाव 1,350 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकते हैं।
फिलहाल घरेलू बाजार में तांबा 1,150-1,170 रुपये प्रति किलोग्राम और वैश्विक बाजार में करीब 12,100 डॉलर प्रति टन के आसपास कारोबार कर रहा है।
केडिया ने कहा कि फिजिकल मार्केट के संकेत भी मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भौतिक मांग में सुधार दिख रहा है, प्रीमियम बढ़ रहे हैं और सप्लाई साइड की चिंताएं बनी हुई हैं। सिल्वर-कॉपर रेशियो को देखें तो 2026 के लिए तांबा अगला बड़ा विजेता बन सकता है।
इसी बीच, केडिया एडवाइजरी के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अमित गुप्ता ने कहा कि अमेरिका की मजबूत आर्थिक वृद्धि से कॉपर-इंटेंसिव सेक्टरों को सपोर्ट मिला है। उन्होंने बताया कि वर्षों से कम निवेश, खदानों में व्यवधान और चीनी स्मेल्टर्स द्वारा प्रस्तावित उत्पादन कटौती ने आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है।
उनके अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ग्रिड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है। कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट रितेश कुमार साहू ने कहा कि इंडोनेशिया, चिली और पेरू में खदानों से जुड़े व्यवधानों ने वैश्विक आपूर्ति को और सीमित कर दिया है। उन्होंने बताया कि इसका असर पूरी सप्लाई चेन पर दिख रहा है और चीनी स्मेल्टर्स को 2026 के लिए शून्य ट्रीटमेंट और रिफाइनिंग चार्ज स्वीकार करने पड़ रहे हैं।
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सुभ्रानिल डे ने भी तेजी का अनुमान जताते हुए कहा कि निकट भविष्य में तांबे की कीमतें 1,300 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक जा सकती हैं।