विक्रमसिंघे की भारतीय निवेश पर टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रैल के पहले सप्ताह में प्रस्तावित श्रीलंका यात्रा के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अप्रैल को श्रीलंका का दौरा करेंगे। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद में इस यात्रा की तारीख की घोषणा की थी।
पीएम मोदी की श्रीलंका यात्रा से पहले वहां के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अदाणी समूह के साथ मन्नार में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना को आगे बढ़ाने में फेल रहने के लिए वर्तमान सरकार को दोषी ठहराया। इतना ही नहीं, विक्रमसिंघे ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए अक्षय ऊर्जा, कृषि और व्यापार संबंधों के क्षेत्रों में दक्षिण भारत-केंद्रित आर्थिक ढांचे पर जोर दिया।
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विक्रमसिंघे ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने भारत के साथ आर्थिक सहयोग के लिए कई रास्ते तलाशे, लेकिन अफसोस की बात है कि मौजूदा सरकार मन्नार में अदाणी समूह के साथ अक्षय ऊर्जा परियोजना को आगे बढ़ाने में फेल साबित हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें अदाणी हरित ऊर्जा परियोजना पर फिर से बातचीत करने के एनपीपी सरकार के प्रयास में कोई तर्क नहीं दिखता। यह न सिर्फ उर्जा परियोजना बल्कि द्वीप राष्ट्र में भारत द्वारा निवेश की गई सभी परियोजनाओं पर प्रतिकूल असर डालेगा।
पांच अप्रैल को श्रीलंका दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी
विक्रमसिंघे की भारतीय निवेश पर टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रैल के पहले सप्ताह में प्रस्तावित श्रीलंका यात्रा के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अप्रैल को श्रीलंका का दौरा करेंगे। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद में इस यात्रा की तारीख की घोषणा की। विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने पिछले हफ्ते बताया था कि मोदी श्रीलंका में 2024 में राष्ट्रपति दिसानायके की दिल्ली यात्रा के दौरान हुए समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए कोलंबो आएंगे। साथ ही राष्ट्रपति ने संसद में यह भी बताया कि मोदी की यात्रा के दौरान श्रीलंका के त्रिंकोमाली जिले में सामपुर विद्युत संयंत्र का निर्माण शुरू होगा। वहीं, भारत और श्रीलंका ने पिछले महीने त्रिंकोमाली में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए समझौता किया था। इसके तहत, 50 मेगावाट (चरण 1) और 70 मेगावाट (चरण 2) क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह संयंत्र सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड और भारत के राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (एनटीपीसी) द्वारा मिलकर बनाए जाएंगे।
क्या है अदाणी समूह की परियोजना?
अदाणी समूह मन्नार और पूनरी के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में 484 मेगावाट पवन ऊर्जा के विकास के लिए 20 साल के समझौते में 440 मिलियन अमेरिकी डालर से अधिक का निवेश करने वाला था। लेकन जब राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व वाली नई सरकार ने टैरिफ को लेकर दोबारा वार्ता करने की बात कही तो 13 फरवरी को अदाणी ग्रीन एनर्जी ने द्वीप राष्ट्र में प्रस्तावित दो पवन ऊर्जा परियोजनाओं से खुद को हटाने का फैसला किया। इन परियोजनाओं में पवन ऊर्जा से बिजली बनाने और इसे उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए लाइनें बिछाने का काम करना था। और इसमें कुल 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करना था।
बीते साल के राष्ट्रपति चुनाव से पहले एनपीपी ने कहा था कि वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में अदाणी समूह के साथ अक्षय ऊर्जा परियोजना को रद्द कर देगी। बाद में सत्ता हासिल करने के बाद, एनपीपी कैबिनेट ने समझौते को लेकर दोबारा वार्ता करने का फैसला लिया। कैबिनेट ने इसके पीछे तर्क दिया कि पिछली विक्रमसिंघे सरकार द्वारा सहमत खरीद मूल्य महंगा था। साथ ही इसमें भ्रष्टाचार होने के भी संकेत थे।
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