रेल बजट को अलग से पेश न करने की हो रही सिफारिश।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख कर बरसों से अलग से रेल बजट पेश करने की परंपरा को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने इसे आम बजट में ही समाहित करने को कहा है।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रभु ने जेटली से कहा है कि अलग से रेल बजट पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म होनी चाहिए। इसे आम बजट में ही मिला देना चाहिए। आइए जानते हैं क्यों रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया जाता है।
1921 में ब्रिटिश रेलवे अर्थशास्त्री विलिमय एक्वर्थ को इंडियन रेवले कमेटी का चेयरमैन बनाया गया, जिसके बाद एक्वर्थ ने पाया कि रेलवे सिस्टम में बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत है।
कमेटी की तरफ से रेलवे को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे एक्वर्थ रिपोर्ट कहा गया। इस रिपोर्ट में रेलवे के पुनर्संगठन के बारे में कुछ बिंदुओं पर सुझाव दिए गए।
इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए 1924 में रेलवे को आम बजट से अलग करने का निर्णय लिया गया। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही ये प्रक्रिया आज भी लागू है और रेल बजट आम बजट से अलग पेश किया जाता है।