बैंक एफडी व सरकारी प्रतिभूतियों के बीच खास अंतर
| खूबी |
बैंक एफडी |
10-वर्षीय सरकारी प्रतिभूति |
| सुरक्षा |
5 लाख रुपये तक का बीमा (DICGC) |
सॉवरेन गारंटी-असीमित सुरक्षा |
| तरलता |
समय से पहले निकालने पर जुर्माना |
सेकेंडरी मार्केट में कभी भी बेच सकते हैं |
| रिटर्न |
फिक्स्ड, पर रिन्यूअल पर रेट गिरने का डर |
10 साल के लिए यील्ड 'लॉक' |
| टैक्स |
स्लैब रेट के हिसाब से |
ब्याज स्लैब रेट पर,लेकिन कैपिटल गेन पर इंडेक्सेशन का लाभ (लिस्टेड होने पर) |
सरकारी बॉन्ड्स का जादुई फायदा
सरकारी कागजों की कीमत और बाजार की ब्याज दरें एक तराजू की तरह हैं। जब बाजार में ब्याज दरें नीचे आती हैं, तो पुराने सरकारी कागजों की कीमत बढ़ जाती है।
एक उदाहरण से समझिए: मान लीजिए आपके पास एक सरकारी बॉन्ड है, जो 10 साल तक आपको 7% ब्याज देगा। दो साल बाद बाजार में नए बॉन्ड पर ब्याज गिरकर 6% रह गया। अब हर कोई आपका 7% वाला बॉन्ड खरीदना चाहेगा। ऐसे में आप अपने बॉन्ड को बाजार में ऊंचे दाम पर बेच सकते हैं। बैंक एफडी में यह मुमकिन नहीं है।
ऊंचे रिटर्न के साथ लंबी अवधि की सुरक्षा
लंबी अवधि के बॉन्ड्स 6.8% से 7.2% के बीच यील्ड दे रहे हैं, जबकि SDLs 7.3% से 7.7% की पेशकश कर रहे हैं। ये यील्ड अधिकांश बैंक एफडी के बराबर या उससे बेहतर हैं। अतिरिक्त लाभ यह है कि ये पूरी अवधि के लिए लॉक हो जाते हैं। इमरजेंसी फंड और अल्पकालिक जरूरतों के लिए एफडी का हमेशा एक स्थान रहेगा। हालांकि, हालिया भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने पर ब्याज दरें बढ़ने की चिंता हो सकती है, जिसका बॉन्ड पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इसलिए निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले हमेशा किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।
आपको कब और क्यों यहां आना चाहिए?
सेवानिवृत्त लोगों के लिए: अगर आप चाहते हैं कि अगले 10-20 साल तक आपकी मासिक आय कम न हो, तो आज की ऊंची दरों पर सरकारी कागजों को 'लॉक' कर देना सबसे बुद्धिमानी है।
बड़े निवेशकों के लिए: अगर बैंक में आपका पैसा पांच लाख की बीमा सीमा से बहुत ज्यादा है, तो सुरक्षा के लिहाज से सरकारी कागज बैंक से कहीं बेहतर हैं।
भविष्य के लक्ष्यों के लिए: बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए जो पैसा 5-10 साल बाद चाहिए, उसे सरकारी बॉन्ड में रखना सुरक्षित और फायदेमंद है।
डिस्क्लेमर: इस पर छपे विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।
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