Wholesale Inflation: प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी का सूचकांक, जिसकी डब्ल्यूपीआई में 22.62% भागीदारी है, मासिक आधार पर 2.07% गिरा। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 3.08% नरमी आई और कच्चे पेट्रोलियम व्र प्राकृतिक गैस के भाव में भी 2.87% की गिरावट दर्ज की गई। गैर-खाद्य वस्तुओं में 2.53% की वृद्धि हुई, जबकि खनिज कीमतों में 0.48% का इजाफा हुआ। आइए जानते हैं क्या कहते हैं थोक महंगाई के आंकड़े।
भारत की थोक मूल्य मुद्रास्फीति दिसंबर 2024 में बढ़कर 2.37% हो गई, जो नवंबर में 1.89% थी। खाद्य पदार्थों, कपड़ा और अन्य विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ है। मंगलवार को सरकार ने इससे जुड़े आंकड़े जारी किए। खाद्य और कपड़ों की कीमतों में माह-दर-माह आधार पर वृद्धि हुई। समग्र थोक मूल्य सूचकांक में नवंबर की तुलना में 0.38% की गिरावट आई थी।
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प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी का सूचकांक, जिसकी डब्ल्यूपीआई में 22.62% भागीदारी है, मासिक आधार पर 2.07% गिरा। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 3.08% नरमी आई और कच्चे पेट्रोलियम व्र प्राकृतिक गैस के भाव में भी 2.87% की गिरावट दर्ज की गई। गैर-खाद्य वस्तुओं में 2.53% की वृद्धि हुई, जबकि खनिज कीमतों में 0.48% का इजाफा हुआ।
ईंधन और बिजली खंड, जिसका भार 13.15% है, में दिसंबर में 1.90% की वृद्धि दर्ज की गई, जो बिजली की कीमतों में 8.81% की वृद्धि और कोयले में मामूली बढ़त के कारण हुआ। खनिज तेल की कीमतों में 0.06% की गिरावट आई। विनिर्मित उत्पाद, जो सूचकांक में 64.23% हिस्सा रखते हैं, माह-दर-माह आधार पर 143.0 पर अपरिवर्तित रहा
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डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक, जिसमें खाद्य पदार्थ और विनिर्मित खाद्य उत्पाद शामिल हैं, नवंबर में 200.3 से दिसंबर में गिरकर 195.9 पर आ गया। वार्षिक खाद्य मुद्रास्फीति पिछले महीने के 8.92% से थोड़ी कम होकर 8.89% पर आ गई।