फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rupee: रुपए के कब आएंगे अच्छे दिन? 2026 में 95 प्रति डॉलर के आसपास रहने की उम्मीद, जानें रिपोर्ट में क्या

Wed, 06 May 2026 12:14 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

BMI की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय रुपया 2026 के अंत तक डॉलर के मुकाबले करीब 95 रुपये के स्तर पर रह सकता है। फिलहाल रुपया 95.20 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है। 
विज्ञापन
कमजोर पड़ता रुपया - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रुपये पर दबाव बने रहने की आशंका जताई गई है। फिच समूह की कंपनी BMI ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2026 के अंत तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 95 रुपये के स्तर पर बना रह सकता है। फिलहाल भारतीय मुद्रा 95.20 रुपये प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है।

मार्च में रुपया चार प्रतिशत तक कमजोर हुआ

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर साफ दिखाई दे रहा है, खासकर उन देशों पर जो ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं। भारत भी बड़े तेल आयातकों में शामिल है। इसी वजह से मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान रुपया करीब चार प्रतिशत तक कमजोर हुआ।

आरबीआई को लेकर रिपोर्ट में क्या?

BMI ने कहा कि हालांकि रुपये पर दबाव बना रहेगा, लेकिन मुनाफे की निकासी में कमी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप से इसकी गिरावट की रफ्तार सीमित रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI आने वाले महीनों में मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिर रखने की कोशिश करेगा।

जीडीपी वृद्धि दर को लेकर अनुमान?

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रह सकती है, जबकि महंगाई दर 3.4 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। वहीं, भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी के 1.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से 0.4 प्रतिशत अधिक है।

ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता 

बीएमआई के मुताबिक, भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता इसका प्रमुख कारण है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल आयात का 22 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा आयात का था और अगले वित्त वर्ष में इसके और बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस में कमी आने का खतरा भी भारत के चालू खाता घाटे को बढ़ा सकता है।
विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आया, जो देश की जीडीपी का करीब 1 प्रतिशत है। यदि ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों की आय प्रभावित होती है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और रुपये दोनों पर पड़ सकता है।

भारतीय बाजार को लेकर निवेशकों को कम भरोसा

BMI ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और उभरते बाजारों से निवेशकों के बढ़ते जोखिम-परहेज के कारण भारत से विदेशी पूंजी निकासी का दबाव बना रह सकता है। मार्च 2026 में भारत से 13.4 अरब डॉलर की पूंजी निकासी हुई, जो महामारी के बाद सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना गया।

पिछले 12 महीनों में रुपये की स्थिति

रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले 12 महीनों में रुपया करीब 10 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट जनवरी 2022 से दिसंबर 2022 के बीच देखी गई थी, जब अमेरिकी डॉलर के पक्ष में ब्याज दरों का अंतर तेजी से बढ़ा था। उस समय RBI ने बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया था, जिसके चलते विदेशी मुद्रा भंडार में 13 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

BMI का मानना है कि RBI के पास फिलहाल सात महीने के आयात को कवर करने लायक विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिसका इस्तेमाल वह बाजार में भावनात्मक दबाव और पूंजी निकासी को नियंत्रित करने के लिए कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें