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गेहूं की कीमतों में उबाल: 50 दिनों में 150 रुपये से ज्यादा उछले भाव; जानिए आटा, मैदा और ब्रेड-बिस्कुट पर असर

Thu, 15 Oct 2026 03:14 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गेहूं और इसके उत्पादों पर से निर्यात प्रतिबंध हटने के बाद थोक मंडियों में गेहूं के दाम डेढ़ महीने में 150 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा उछल गए हैं। जानिए दिल्ली समेत प्रमुख मंडियों के भाव, पांच साल के उच्चतम बफर स्टॉक के आंकड़े और अपनी रसोई पर इसका असर! पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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गेहूं की कीमतों में इजाफा। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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त्योहारी और आगामी विवाह सीजन की शुरुआत के बीच आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर दबाव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा 24 अगस्त 2026 को गेहूं और इसके उत्पादों (जैसे आटा, मैदा और सूजी) के निर्यात पर से चार साल पुराना प्रतिबंध हटाए जाने के बाद घरेलू थोक मंडियों में गेहूं की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। महज 50 दिनों के भीतर गेहूं का दाम 150 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बढ़ चुका है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी गेहूं के दाम तीन साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचे हुए हैं, जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिल रहा है।

थोक मंडियों में गेहूं की कीमतों की क्या है स्थिति?

राजधानी नई दिल्ली की मंडी में 24 अगस्त 2026 को गेहूं का भाव 2,879 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था, जो 14 अक्तूबर 2026 को बढ़कर 3,030 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। इस अवधि के दौरान अकेले दिल्ली में गेहूं की कीमत में 151 रुपये प्रति क्विंटल यानी 5.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश की अन्य प्रमुख कृषि मंडियों में भी इसी प्रकार की तेजी देखने को मिली है।

विभिन्न मंडियों में गेहूं के भाव में बदलाव (दरें रुपये प्रति क्विंटल में):

मंडी 24 अगस्त को भाव 14 अक्तूबर को भाव बदलाव (रुपये/क्विंटल)
नई दिल्ली 2,879 3,030 +151 (+5.24%)
कानपुर 2,700 2,740 +40
राजकोट 2,700 2,875 +175
कोटा 2,725 2,740 +15
इंदौर 2,725 2,812 +87

(स्रोत: एनसीडीईएक्स / NCDEX)

गेहूं के दामों में तेजी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया तेजी के पीछे निर्यात नीति में ढील के अलावा मौसमी अनिश्चितताएं और मजबूत मांग प्रमुख वजहें हैं।

  • निर्यात प्रतिबंधों का हटना: 24 अगस्त को सरकार द्वारा चार साल पुराना निर्यात प्रतिबंध हटाने से बाजार में लिवाली बढ़ी है।
  • मौसम और अल-नीनो की आशंका: पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर और कमोडिटी रिसर्च हेड मनोज कुमार जैन का कहना है, "मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं और अल-नीनो की आशंका के चलते इस बात की चर्चा है कि आगामी रबी सीजन में गेहूं की बुआई पिछड़ सकती है या उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी डर से बाजार में स्टॉक को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।"
  • त्योहारी एवं वैवाहिक मांग: त्योहारी सीजन और आने वाले विवाह सीजन के कारण मिलर्स की खरीदारी और उपभोक्ता मांग में तेजी आई है।

आपकी जेब और खुदरा बाजार पर इसका क्या असर पड़ेगा?

थोक मंडियों में गेहूं की दरें 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंचने का सीधा असर जल्द ही खुदरा दुकानों में आटा, मैदा, सूजी, ब्रेड और बिस्कुट जैसे बेकरी उत्पादों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 13 अक्तूबर 2026 को अखिल भारतीय औसत खुदरा गेहूं की कीमत 32.05 रुपये प्रति किलो रही, जो एक महीने पहले 31.82 रुपये और एक साल पहले 31.57 रुपये प्रति किलो थी। थोक दरों में आई तेजी के चलते खुदरा कीमतों में आगे और इजाफा होने की संभावना है, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।

सरकारी बफर स्टॉक की क्या स्थिति है?

राहत की बात यह है कि देश में गेहूं का पर्याप्त खाद्य भंडार मौजूद है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2026 को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 479.92 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले पांच वर्षों का उच्चतम स्तर है।

केंद्रीय पूल में 1 सितंबर को गेहूं का स्टॉक (लाख टन में):

वर्ष गेहूं का स्टॉक (लाख टन)
2026 479.92
2025 332.97
2024 251.46
2023 260.37
2022 248.22
2021 517.87

(स्रोत: उपभोक्ता विभाग / भारतीय खाद्य निगम)

आगे का रुझान और सरकार का रुख क्या रहेगा?

बाजार की वास्तविक स्थिति नवंबर के अंत तक स्पष्ट होगी, जब रबी सीजन की बुआई के आधिकारिक आंकड़े सामने आएंगे। यदि रबी बुआई सामान्य रहती है और सरकार अपने बफर स्टॉक से खुले बाजार में अतिरिक्त गेहूं रिलीज करती है, तो कीमतों में अप्रत्याशित उछाल पर रोक लग सकती है। सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर खुले बाजार में स्टॉक जारी कर सकती है।

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