ईरान की अर्थव्यवस्था को भी पहुंचेगा नुकसान
जलडमरूमध्य को बंद करने से वैश्विक व्यापार पर तो प्रभाव पड़ेगा ही लेकिन ईरान की आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है। खासतौर पर चीन के निर्यात पर भी बाधा आएगी। इससे ओमान सहयोग परिषद के साथ संबंधों में तनाव पैदा होने का जोखिम होगा, ये वे देश हैं जो बिना किसी बाधा के नौवहन को महत्व देते हैं। आंतरिक रूप से, ये कदम ईरान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकता है।
भारत के लिए कितनी बड़ी चिंता है?
भारत का लगभग 70% कच्चा तेल और 40% एलएजी आयात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। कतर अकेले भारत को लगभग 10 मिलियन टन एलएनजी की आपूर्ति करता है। अगर यहां कोई बाधा उत्पन्न होती है, तो भारत को दूसरे स्त्रोंतों और मार्गों की तलाश करनी पड़ सकती है। इससे आयात में ज्यादा खर्च होने के साथ देश को लॉजिस्टकल चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
ईरान के साथ भारत का एक और बड़ा हित जुड़ा है, जो चाबहार बंदरगाह से होकर गुजरता है। ईरान के चाबहार बंदरगाह भारत ने 2024 में 10 साल के लिए लीज पर लिया है। ओमान की खाड़ी में स्थित यह बंदरगाह, पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया से भारत को सीधे जोड़ता है। ईरान और भारत ने 2028 में चाबहार पोर्ट तैयार करने का समझौता किया था। इसे भारत के रणनीतिक पोर्ट के तौर पर देखा जाता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) शामिल है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है और इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGAL) के जरिए इसका संचालन किया है।