वैश्विक व्यापार और सीमा शुल्क से जुड़े विवादों की सुनवाई करने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित अधिकांश टैरिफ पर रोक दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक व्यापार युद्ध के कारण महीनों से चल रही उथल-पुथल के बीच यह फैसला आया है। इस फैसले से दुनियाभर के कारोबारियों और निवेशकों ने राहत की सांस ली है।
क्या है अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय?
यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड या अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (US Court of International Trade) न्यूयॉर्क में स्थित एक संघीय अदालत है। यह अदालत सीमा शुल्क और अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून से जुड़े विवादों पर सुनवाई करती है। यह नौ न्यायाधीशों से बना है जिन्हें आजीवन नियुक्त किया जाता है। हालांकि, मामलों की देखरेख आम तौर पर एक न्यायाधीश द्वारा की जाती है। केवल कार्यकारी आदेशों या कांग्रेस के फैसलों से जुड़े मामलों में, तीन न्यायाधीशों का पैनल नियुक्त किया जा सकता है। न्यायालय के निर्णयों पर यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में सुनवाई की जा सकती है। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ असंवैधानिक
ट्रंप प्रशासन के लिए यह फैसला झटके की तरह है। टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए अदालत ने कहा कि ट्रंप ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग किया और संविधान के परे जाकर ये टैरिफ लगाने की कोशिश की है। हालांकि अदालत ने ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमीनियम पर एक अलग कानून का इस्तेमाल कर लगाए गए कुछ इंडस्ट्री विशिष्ट टैरिफ पर रोक नहीं लगाई गई है।
व्यापार न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा है?
व्यापार न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसला में डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ पर लिए गए फैसलों की खिंचाई की। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने आयातित वस्तुओं पर व्यापक टैरिफ लगाने के अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। इससे एक बार फिर अमेरिकी व्यापार के भविष्य में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सीमा शुल्क कानूनों से संबंधित विवादों की सुनवाई करने वाले मैनहट्टन स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने कहा कि अमेरिकी संविधान कांग्रेस को अन्य देशों के साथ व्यापार को विनियमित करने का विशेष अधिकार देता है। लेकिन, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर इस प्रावधान को रद्द नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) का गलत इस्तेमाल किया है। ये कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में कुछ खास शक्तियां देता है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इसका बिना किसी ठोस आधार के ही इस्तेमाल कर लिया।
अदालत ने कहा- संविधान ट्रंप के फैसलों की अनुमति नहीं देता
तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने जनवरी से ट्रंप सरकार की ओर से जारी किए गए व्यापक टैरिफ आदेशों पर स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने का निर्णय लिया। पीठ ने कहा कि यह फैसला इसलिए अस्वीकार्य नहीं है कि यह नासमझी भरा या अप्रभावी है, बल्कि इसलिए अस्वीकार्य है क्योंकि संविधान इसकी अनुमति ही नहीं देता। अदालत के फैसले के बाद वित्तीय बाजारों में तेजी देखी गई। अमेरिकी डॉलर में भी तेजी आई। वॉल स्ट्रीट वायदा में बढ़त दिखी और एशियाभर में इक्विटी में भी उछाल आया।
कनाडा और मैक्सिको के उत्पादों पर 25% टैरिफ का फैसला खारिज
न्यायालय ने ट्रम्प की ओर से कनाडा और मैक्सिको से आने वाले कई उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को भी रोक दिया है। जिसे ट्रम्प ने अवैध प्रवास और मादक पदार्थों की तस्करी पर आपातकाल का हवाला देते हुए लगाया था। इससे चीन से आने वाले अधिकांश सामानों पर 20 प्रतिशत टैरिफ पर भी पाबंदी लगा दी गई है। अदालत ने यह फैसला दो मामलों की सुनवाई के दौरान दिया। इनमें एक डेमोक्रेटिक गवर्नरों के नेतृत्व वाले 12 राज्यों की ओर से दायर किया गया था। जबकि दूसरा मामला पांच कंपनियों के समूह की ओर से दायर किया गया था। इसमें दावा किया गया था कि राष्ट्रपति की ओर से कार्यकारी शक्ति के अनुचित प्रयोग से उन्हें नुकसान हुआ।
निवेशक और व्यवसाय अब क्या कह रहे?
बुधवार को कारोबार के बाद प्रमुख शेयर बाजार सूचकांकों में तेजी देखी गई। ट्रम्प के व्यापार युद्ध की शुरुआत के बाद से बाजार में उथल-पुथल मची हुई है, नीतियों और टैरिफ की अनिश्चितता के कारण बाजार में बेचैनी देखी जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए कीमतें बढ़ गई हैं।
अदालत ने दिया निर्देश- 10 दिन में जारी करें नया आदेश
व्यापार न्यायालय के न्यायाधीशों ने ट्रंप प्रशासन को 10 दिनों के भीतर टैरिफ पर स्थायी रोक को दर्शाते हुए नया आदेश जारी करने को कहा है। इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया साइट पर दावा किया कि उनकी टैरिफ नीति अमेरिका को फिर से महान बनाने के लिए जरूरी थी।