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ITR : आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख और ड्यू डेट में क्या अंतर? जुर्माने से बचने के लिए समय पर करें ये काम

सार

दरअसल, अंतिम तारीख वह होती है, जब आप देर से आईटीआर भरते हैं यानी बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते हैं। इस तारीख के बाद रिटर्न भरने का कोई विकल्प नहीं रहता है। वहीं, ड्यू डेट समय पर बिना किसी जुर्माने के आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा होती है।
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आयकर विभाग - फोटो : ANI
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विस्तार
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आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने वाले ज्यादातर लोग इस बात से अनजान होते हैं कि रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख और ड्यू डेट दोनों अलग-अलग हैं। इस अंतर को समझना इसलिए भी जरूरी है, ताकि जुर्माना, ब्याज और टैक्स से जुड़े लाभ के रूप में आपको नुकसान न हो।

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दरअसल, अंतिम तारीख वह होती है, जब आप देर से आईटीआर भरते हैं यानी बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते हैं। इस तारीख के बाद रिटर्न भरने का कोई विकल्प नहीं रहता है। वहीं, ड्यू डेट समय पर बिना किसी जुर्माने के आईटीआर दाखिल करने की समय-सीमा होती है।

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इस बार ड्यू डेट 15 सितंबर
आकलन वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न भरने की ड्यू डेट 31 जुलाई, 2025 थी, जिसे बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 किया जा चुका है। अगर इस तारीख तक रिटर्न नहीं भरते हैं, तो लेट फीस के साथ 31 दिसंबर, 2025 तक बिलेटेड आईटीआर भर सकते हैं। ड्यू डेट निकलने के बाद कुछ शर्तों के तहत अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

...नहीं तो हो सकते हैं कई नुकसान
आकलन वर्ष 2025-26 के लिए अगर आप 15 सितंबर, 2025 तक आईटीआर भरने से चूक जाते हैं, तो कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। अगर आपने इस साल कोई घाटा दिखाया है (स्टॉक मार्केट में घाटा), जिसे अगले वर्षों में एडजस्ट करना चाहते हैं, तो आपको यह सुविधा नहीं मिलेगी। इसका मतलब है आप उस घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।

  • एक और बड़ा असर ब्याज एवं लेट फीस का होता है। अगर आपने समय पर एडवांस टैक्स नहीं भरा, तो उस पर ब्याज देना पड़ेगा। इसके अलावा, अगर आपको टैक्स रिफंड मिलना है, तो देरी से आयकर रिटर्न दाखिल करने पर आपको मिलने वाले रिफंड पर ब्याज भी कम हो सकता है।

ड्यू डेट के बाद लेट फीस का करना होगा भुगतान
अगर आप ड्यू डेट यानी 15 सितंबर के बाद आईटीआर दाखिल करते हैं और आपकी कुल करयोग्य आय यानी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको 5,000 रुपये तक लेट फीस का भुगतान करना होगा। अगर करयोग्य आय 5 लाख रुपये से कम है, तो लेट फीस 1,000 रुपये तक लगेगी। ऐसे में बेहतर यही होगा कि 15 सितंबर, 2025 से पहले ही अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर लें, ताकि आपको किसी तरह का जुर्माना न देना पड़े और न ही ब्याज या टैक्स से जुड़े अन्य लाभ का नुकसान हो। 

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आईटीआर भरने के बाद सत्यापन जरूरी
आईटीआर दाखिल करने के बाद 30 दिन के भीतर उसे सत्यापित करना न भूलें, अन्यथा सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। इससे न सिर्फ आपका रिफंड अटक जाएगा, बलि्क रिटर्न खारिज भी हो सकता है। आप ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके से आईटीआर सत्यापन कर सकते हैं। नेटबैंकिंग, आधार ओटीपी, एटीएम कार्ड, बैंक और डीमैट अकाउंट के जरिये सत्यापन कर सकते हैं। -स्वीटी मनोज जैन टैक्स एवं निवेश सलाहकार

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