केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट भाषण के दौरान फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का एलान किया। इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स व निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज की गई।
बजट प्रस्तावों के मुताबिक, फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किया गया है। इस फैसले से डेरिवेटिव्स बाजार में कारोबार की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर सक्रिय और शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स पर पड़ेगा।
इसके साथ ही सरकार ने शेयर बायबैक से मिलने वाली आय को सभी श्रेणियों के शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन के तहत टैक्स करने का भी ऐलान किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन कदमों से जहां एक ओर टैक्स राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक सट्टेबाजी पर लगाम लग सकती है। हालांकि, बार-बार और बड़े वॉल्यूम में ट्रेड करने वाले निवेशकों का शुद्ध मुनाफा घटने की आशंका जताई जा रही है।
अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हित में सभी तरह के शेयरधारकों के लिए बायबैक का प्रस्ताव। हालांकि कर मध्यस्थता के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रमोटरों को अतिरिक्त बायबैक टैक्स देना होगा। इससे कॉरपोरेट प्रमोटरों के लिए प्रभावी टैक्स 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट प्रमोटरों के लिए प्रभावी टैक्स 30 प्रतिशत हो जाएगा। साथ ही अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हित में सभी तरह के शेयरधारकों को बायबैक के जरिए होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन के रूप में टैक्स लगाया जाएगा।
शेयर मार्केट और निवेशकों के लिए बड़े एलान
- प्रमोटरों की ओर से दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त बायबैक कर का प्रावधान।
- सभी शेयरधारकों के बायबैक पर पूंजीगत लाभ के रूप में कर का प्रस्ताव।
- कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए 22 प्रतिशत टैक्सेशन।
- गैर कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए 30 प्रतिशत टैक्स।
- वायदा सौदों पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया।
- ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किया।
एसटीटी में हुए बदलावों का बड़ा नकारात्मक असर नहीं पडे़गा
केंद्रीय बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में प्रस्तावित बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि शेयर बाजार इन बदलावों को समय के साथ आत्मसात कर लेगा और इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि एसटीटी में बढ़ोतरी से न तो स्टॉक ब्रोकर्स की एसेट क्वालिटी पर और न ही एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों पर कोई खास असर पड़ने की संभावना है। चौहान के मुताबिक, बाजार ऐसे बदलावों के अनुसार खुद को धीरे-धीरे ढाल लेता है।
आशीष चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि एसटीटी में प्रस्तावित वृद्धि का NSE के प्रस्तावित आईपीओ या पहले से सूचीबद्ध कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति इन कर परिवर्तनों से कहीं अधिक मजबूत है, जिससे बाजार की स्थिरता बनी रहेगी।