विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद को एक ऐसी चुनौती बताया है जो कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिए दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता की जरूरत है।डबलिन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में "भारत का विश्व के प्रति दृष्टिकोण" विषय पर भाषण देते हुए जयशंकर ने 1985 में हुए एयर इंडिया कनिष्क विमान बम विस्फोट का जिक्र किया। विदेश मंत्री बताया कि इस हमले में मारे गए 329 लोगों की याद में आयरलैंड के अहाकिस्ता गांव में एक स्मारक पट्टिका लगाई गई है। यह हमें लगातार याद दिलाती है कि आतंकवाद एक स्थायी खतरा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
जयशंकर ने कहा, "संघर्ष हमेशा हिंसक और दर्दनाक होते हैं, लेकिन दुनिया में जो कुछ हो रहा है, वह अक्सर हमारी नजरों से छूट जाता है। आज दुनिया में लगभग 60 बड़े संघर्ष चल रहे हैं, लेकिन अखबारों और टीवी में सिर्फ दो-तीन पर ही चर्चा होती है। यह चिंता की बात है कि इन संघर्षों के कारण कई देश अपने सतत विकास लक्ष्यों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।" विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद और संघर्षों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना जरूरी है, ताकि भविष्य सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सके।
भारत-यूरोप संबंधों पर भी बोले जयशंकर
भारत और यूरोप के हाल के वर्षों में तालमेल बढ़ा है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन में यह बात कही। "भारत का विश्व के प्रति दृष्टिकोण" विषय पर अपने भाषण में, जयशंकर ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की अपने 21 आयुक्तों के साथ हाल ही में की गई भारत यात्रा की भी चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ लगभग 23 वर्षों से मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं। विदेश उम्मीद जताई कि यह कवायद इस साल के अंत तक समाप्त हो जाएगी।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के एक बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ ही यूरोप के साथ हमारा संपर्क बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "हम वर्तमान में पांचवें स्थान पर हैं, हम निश्चित रूप से इस दशक के अंत तक तीसरे स्थान पर होंगे। हम यूरोप के साथ रिश्ते में बहुत कुछ होते हुए देखते हैं और आयरलैंड इसका एक अभिन्न अंग है, जो स्पष्ट रूप से इस स्थिति का लाभ उठाएगा।"
भारत और आयरलैंड के बीच व्यापार का बहुत मजबूत स्तर
जयशंकर ने कहा कि भारत और आयरलैंड के बीच व्यापार का "बहुत मजबूत स्तर" है। दोनों देशों की अग्रणी कंपनियों ने एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं मौजूदगी बढ़ाई है। दोनों देशों के बीच वर्तमान में 16 अरब पाउंड के व्यापार का अनुमान है। लेकिन मुझे आशंका है कि यह आंकड़ा थोड़ा और बड़ा है। आयरलैंड के साथ दिलचस्प बात यह है कि वास्तव में सेवाओं में हमारा व्यापार हमारे माल के व्यापार से बहुत अधिक है, और यह वास्तव में हमारे लिए काफी असामान्य है। हमारी कई प्रमुख आईटी कंपनियां यहां हैं। मुझे लगता है कि आप में से अधिकांश जानते हैं कि हमारी कुछ फार्मा कंपनियां यहां हैं, और मैं कहूंगा कि व्यापार के मामले में कई घरेलू आयरिश नामों की भारत में भी लंबे समय से उपस्थिति है।"
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पर्यटन बढ़ रहा है और मैत्रीपूर्ण वीजा नीति भी जल्द अमल में आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक दृष्टिकोण से भारत और आयरलैंड के बीच कई तंत्र सक्रिय हैं।
भारत के विकास पर प्रकाश डालते हुए, जयशंकर ने कहा, "अब, दो विचार हैं जो मुझे लगता है कि आयरलैंड के लोगों के लिए भारत के बारे में समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम अपने भविष्य के संबंधों पर विचार करते हैं, एक यह कि आज भारत एक ऐसे प्रक्षेपवक्र पर है जहां, मैं कहूंगा कि इसके आगे लगभग 7 प्रतिशत प्लस माइनस विकास के दशक हैं और इससे मांग की एक नई मात्रा और उपभोग का एक अलग पैटर्न बनेगा।"
जयशंकर बोले- हम हर वर्ष औसतन 7 हवाई अड्डे बना रहे
जयशंकर ने कहा कि हम औसतन प्रति वर्ष लगभग 7 हवाई अड्डे बना रहे हैं। हम प्रतिदिन लगभग 28 से 30 किलोमीटर का हाईवे बना रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी, आप जानते हैं कि पिछले दशक में भारत में लगभग 7000 नए कॉलेज खुले हैं। इसलिए, भारत में बहुत कुछ हो रहा है। भारत में बहुत कुछ बदल रहा है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान देगा। निश्चित रूप से आयरलैंड जैसे देश को इस पर ध्यान देना चाहिए।
अपने संबोधन में जयशंकर ने चेन्नई के सेंट पैट्रिक स्कूल में अपनी पढ़ाई के समय को भी याद किया। उन्होंने कहा, "जब मैं इस यात्रा की तैयारी कर रहा था, तो मुझे लगा कि भारत और आयरलैंड के बीच का इतिहास कितना जटिल है। एक ओर, आयरलैंड भारत के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का एक हिस्सा था। आयरिश भारत में प्रशासन, सेना, चिकित्सा, रेलवे, इंजीनियरिंग, शिक्षा और आयरिश मिशनरियों में मौजूद थे और जैसा कि मैंने कहा, आयरलैंड के शिक्षाविद भारत के कोने-कोने में फैले हुए थे। मैंने खुद अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक स्कूल नामक स्कूल में की। चेन्नई में इससे अधिक आयरिश और कुछ नहीं हो सकता।"
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आयरलैंड का स्वतंत्रता संग्राम भारत और उसके राष्ट्रीय आंदोलन के लिए प्रेरणास्रोत है। जयशंकर ने एनी बेसेंट और सिस्टर निवेदिता जैसे आयरिश मूल के लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े थे।