सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान मुद्दे पर दूरसंचार कंपनियों को राहत तो दे दी है, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव में चल रही वोडा आइडिया बोझ घटाने के लिए टैरिफ बढ़ा सकती है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आदित्य बिड़ला समूह की आइडिया और ब्रिटेन के वोडाफोन का संयुक्त उपक्रम वोडा आइडिया अपने टैरिफ में 27 फीसदी का बड़ा इजाफा कर सकती है।
ब्रोकरेज फर्म आईआईएफएल सिक्योरिटीज के प्रमुख शोधकर्ता अभिमन्यु सोफत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दूरसंचार कंपनियों को राहत तो मिली है, लेकिन देनदारी चुकाना अब भी आसान नहीं होगा। खासतौर से वोडा आइडिया को एजीआर के रूप में सालाना औसतन 7,500 करोड़ रुपये देने होंगे। कंपनी की अन्य देनदारियों को मिलाकर वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 में 7 से 24 हजार करोड़ का बोझ आएगा। कंपनी का मौजूदा राजस्व 6,100 करोड़ है, जो 10 हजार करोड़ तक बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में एकमात्र विकल्प टैरिफ बढ़ाना है, जो 27 फीसदी तक बढ़ सकता है। कंपनी ने दिसंबर, 2019 में 30 फीसदी टैरिफ बढ़ाया था जिससे राजस्व में 20 फीसदी इजाफा हुआ था।
वोडा आइडिया पर 1.19 लाख करोड़ की देनदारी
जून, 2020 के आखिर तक वोडा आइडिया पर कर्ज के साथ कुल 1.19 लाख करोड़ रुपये की देनदारी है। इसी दौरान कंपनी के राजस्व में 5.8 फीसदी की गिरावट भी आई है। लिहाजा एजीआर के बोझ को कम करने के लिए कंपनी सरकार से स्पेक्ट्रम बकाया भुगतान पर दो साल की मोहलत मांग सकती है। इसके अलावा पूंजी जुटाने के लिए फाइबर एसेट की बिक्री भी कर सकती है।