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Videocon Case: चंदा कोचर को बड़ा झटका, अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा- 'प्रथम दृष्टया' मनी लॉन्ड्रिंग का केस

Tue, 22 Jul 2025 08:25 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि वीडियोकॉन समूह से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में चंदा कोचर और उनके पति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का "प्रथम दृष्टया" मामला बनता है। न्यायाधिकरण ने दंपत्ति के करोड़ों रुपये मूल्य के मुंबई स्थित फ्लैट को कुर्क करने के ईडी के 2020 के आदेश को बरकरार रखा।
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आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) चंदा कोचर - फोटो : ANI
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विस्तार
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि वीडियोकॉन समूह से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में चंदा कोचर और उनके पति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का "प्रथम दृष्टया" मामला बनता है। न्यायाधिकरण ने दंपत्ति के करोड़ों रुपये मूल्य के मुंबई स्थित फ्लैट को कुर्क करने के ईडी के 2020 के आदेश को बरकरार रखा।

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न्यायाधिकरण का आदेश
न्यायाधिकरण ने कहा, इस मुद्दे का फैसला निचली अदालत द्वारा किया जाएगा, लेकिन हम प्रथम दृष्टया प्रतिवादियों के खिलाफ धन शोधन का अपराध करने का मामला पाते हैं और इसलिए ईडी का  अस्थायी कुर्की आदेश उचित है। दीपक कोचर और यहां तक कि वीडियोकॉन समूह द्वारा शुरू किए गए उद्योगों के काम में पूरी तरह से हेराफेरी की गई थी।

न्यायाधिकरण ने कहा, आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन उद्योग समूह को 300 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत करना, जिसकी समिति में चंदा कोचर भी शामिल थीं, बैंक के नियमों और नीति के विरुद्ध था।  न्यायाधिकरण ने कहा कि फ्लैट उपरोक्त 64 करोड़ रुपये में से खरीदा गया था और इसलिए ईडी ने इसे अपराध की आय बताते हुए जब्त कर लिया था। न्यायाधिकरण ने चंदा कोचर की इस दलील को खारिज कर दिया कि उन्हें अपने पति के व्यावसायिक मामलों की जानकारी नहीं थी और उन्होंने अपनी दलील में अनभिज्ञता का दावा किया था।
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क्या है मामला?
न्यायाधिकरण ने तीन जुलाई के आदेश में कहा था कि वह ईडी द्वारा चंदा कोचर के खिलाफ लगाए गए ‘लेन-देन के बदले लाभ’ के आरोप में संलिप्त पाता है। यह आरोप 300 करोड़ रुपये का ऋण वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (वीआईईएल) को मंजूर करने से जुड़ा है। ऋण मिलने के बाद वीडियोकॉन ग्रुप ने 64 करोड़ रुपये की राशि एनआरपीएल नाम की कंपनी को हस्तांतरित की। एनआरपीएल चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी है।

इस लोन को आईसीआईसीआई बैंक की मंजूरी जून 2009 और अक्टूबर 2011 के बीच मंजूरी दी गई थी और चंदा कोचर निजी लोन देने वाली कंपनी की एमडी और सीईओ होने के अलावा इस समिति की सदस्य भी थीं।

सीबीआई की एक प्राथमिकी पर आधारित ईडी के मामले में दावा किया गया है कि चंदा कोचर ने इस राशि को मंजूरी देते समय अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके आईसीआईसीआई बैंक को धोखा देने के लिए एक आपराधिक साजिश रची। जांच एजेंसियों के अनुसार, चंदा कोचर ने अपने पति के माध्यम से वीआईएल या वीडियोकॉन समूह के प्रमोटर वीएन धूत से अवैध रूप से अनुचित लाभ प्राप्त किया।

ईडी ने कुर्क किया था फ्लैट
ईडी ने जनवरी 2020 में मुंबई के चर्चगेट स्थित सीसीआई चैंबर्स में स्थित कोचर के फ्लैट नंबर 45 को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था, जो एनआरपीएल की एक संपत्ति है। इसके अलावा, एजेंसी द्वारा दीपक कोचर की एक अन्य कंपनी पर छापे के दौरान जब्त की गई 10.5 लाख रुपये की नकदी भी कुर्क की गई थी।

धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के निर्णायक प्राधिकार ने नवंबर 2020 में ईडी की कुर्की की पुष्टि करने से इनकार कर दिया था और परिणामस्वरूप, संघीय जांच एजेंसी ने अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की थी।

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