फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Insurance: अगर आपका भी रिजेटक्ट हो जाता है मोटर बीमा का दावा? फाइल करते समय भूल कर भी ना करें ये गलतियां

Mon, 18 Nov 2024 03:44 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

कई वाहन मालिक मामूली क्षति के मामलों में बीमा कंपनी को सूचित करने या उनकी मंजूरी का इंतजार किए बिना कार की मरम्मत करवा लेते हैं। ओडी दावों में बीमा कंपनी को मरम्मत को मंजूरी देने से पहले नुकसान का निरीक्षण करना जरूरी होता है।
विज्ञापन
Vehicle Insurance - फोटो : Freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मोटर बीमा दावा दाखिल करते समय कई पॉलिसीधारक ऐसी गलतियां करते हैं जिनसे देरी, विवाद या दावा अस्वीकार होने की संभावना बढ़ जाती है। चाहे वह स्वयं के नुकसान (ओडी) के लिए हो या थर्ड पार्टी (टीपी) के लिए। प्रक्रिया को समझना और गलतियों से बचना जरूरी है, ताकि दावा प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो सके। मोटर बीमा दावा फाइल करते समय इन गलतियों से बचेंगे तो आपका दावा जल्दी पूरा होगा।
विज्ञापन


बीमा कंपनी को तुरंत जानकारी नहीं देना
पॉलिसीधारकों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि दुर्घटना के बाद बीमा कंपनी को देर से बताते हैं। इस कदम में देरी से दावे में देरी या अस्वीकार भी हो सकता है, विशेष रूप से ओडी मामलों में, जहां बीमा कंपनी को नुकसान का जल्दी से आकलन करना जरूरी होता है। बीमा कंपनी दुर्घटना के 24 से 48 घंटों के भीतर ओडी दावों के लिए जानकारी मांगती हैं। टीपी दावों के लिए भी बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करना उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनमें तीसरी पार्टी की चोट या क्षति शामिल होती है और इसके बाद कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं।

बीमा कंपनी की मंजूरी के बिना वाहन की मरम्मत करवाना
कई वाहन मालिक मामूली क्षति के मामलों में बीमा कंपनी को सूचित करने या उनकी मंजूरी का इंतजार किए बिना कार की मरम्मत करवा लेते हैं। ओडी दावों में बीमा कंपनी को मरम्मत को मंजूरी देने से पहले नुकसान का निरीक्षण करना जरूरी होता है। यदि बिना मंजूरी के मरम्मत करवाई जाती है, तो बीमा कंपनी दावा अस्वीकार कर सकती है या मरम्मत के खर्च का कुछ हिस्सा ही कवर कर सकती है। पॉलिसीधारक को वाहन को निरीक्षण के लिए नेटवर्क गैराज में ले जाना होता है।
विज्ञापन


जरूरत पड़ने पर एफआईआर न दर्ज करना
टीपी दावों में पुलिस के पास एफआईआर दर्ज कराना जरूरी है। खासकर जब मामला चोट, मृत्यु, या बड़ी संपत्ति नुकसान से जुड़ा हो। ओडी दावों के लिए भी चोरी, तोड़-फोड़, या बड़े हादसों के मामलों में एफआईआर की जरूरत हो सकती है।

गलत या अधूरी जानकारी देना
क्लेम फॉर्म में गलत या अधूरी जानकारी अस्वीकृति या देरी का कारण बन सकती है। ओडी और टीपी दोनों दावों के लिए दी गई जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। किसी भी प्रकार की गलती जैसे दुर्घटना की गलत तारीख, गायब दस्तावेज, या असंगत बयान बीमा कंपनी के लिए संदेह पैदा कर सकते हैं।

बिना वैध लाइसेंस के ड्राइविंग
ओडी और टीपी दावा स्वीकृति की प्राथमिक शर्तों में से एक यह है कि दुर्घटना के समय पॉलिसीधारक या ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं है, तो बीमा मंजूर नहीं होगा। कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

नशे की हालत में ड्राइविंग
शराब या ड्रग्स के नशे में ड्राइविंग करना मोटर बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। दुर्घटना ड्राइवर के नशे की हालत में हुई तो ओडी या टीपी दोनों बीमा दावा तुरंत अस्वीकार कर दिया जाएगा। सभी ट्रैफिक नियमों का पालन भी जरूरी है।

उचित दस्तावेजों की कमी
किसी भी मोटर बीमा दावा के लिए उचित दस्तावेज नहीं है तो दावे में देरी या अस्वीकार भी होने की संभावना रहती है।

कोट- कुछ बीमा कंपनियां तत्काल क्लेम सेवाएं भी देती हैं, जहां आपको केवल क्षतिग्रस्त वाहन की तस्वीरें और बुनियादी दस्तावेज अपलोड करना होता है। इसके बाद बीमा कंपनी 20 मिनट में सहमत दावा राशि दे देती है। ग्राहकों को छोटे-मोटे दावे करने से बचना चाहिए। छोटे दावे करने से नो क्लेम बोनस का नुकसान हो सकता है, जो दावा राशि से अधिक मूल्यवान हो सकता है। सुभाषिश मजूमदार, प्रमुख - मोटर वितरण, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें