डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच1-बी वीजा के लिए आवेदन शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। श्रम मंत्री एलेक्जेंडर एकोस्टा ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि एक अप्रेंटिस कार्यक्रम को विस्तार देने के संबंध में निधि बढ़ाने के लिए यह प्रस्ताव दिया गया है।
लेकिन पूर्व के अनुभवों के आधार पर देखा जाए जो भारतीय आईटी कंपनियों को प्रस्तावित शुल्क बढ़ोतरी से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है। भारतीय आईटी कंपनियों की ओर से एच-1 बी वीजा के लिए काफी आवेदन दिए जाते हैं।
एच-1 बी वीजा गैर आव्रजक वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विशिष्ट पेशों जिनमें तकनीकी या सैद्धांतिक विशेषज्ञता चाहिए होती है, में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की इजाजत देता है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां हर साल भारत एवं चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इस पर निर्भर होती है।