सबसे बड़े चमड़ा उत्पादन केंद्रों में से एक कोलकाता
भारत के चमड़ा निर्यात में पश्चिम बंगाल का योगदान लगभग आधा है। इसका मूल्य 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष है, जिसमें से अमेरिका लगभग 20 प्रतिशत निर्यात करता है। देश के सबसे बड़े चमड़ा उत्पाद केंद्रों में से एक कोलकाता में 538 चमड़ा कारखाने, 230 फुटवियर इकाइयां और 436 चमड़ा उत्पाद इकाइयां हैं।
यूरोपीय बाजारों पर भी पड़ा सकता है असर
उद्योग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इसका असर यूरोपीय बाजारों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कोलकाता में निर्मित सामान को अमेरिका भेजे जाने से पहले अक्सर यूरोप से होकर गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि निर्यातक अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए "मेड इन यूरोप" टैग प्राप्त करने के लिए यूरोप में आंशिक उत्पादन सहित वैकल्पिक उपाय तलाश रहे हैं।
फुटवियर उद्योग को बड़ा खतरा
फुटवियर श्रेणी पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि वैश्विक चमड़ा निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। उद्योग के हितधारकों ने बताया कि अकेले वित्त वर्ष 2025 में, भारत से अमेरिका को चमड़े के फुटवियर का निर्यात लगभग 50 करोड़ डॉलर का था।
इंजीनियरिंग निर्यात है असुरक्षित
इंजीनियरिंग सामान क्षेत्र भी असुरक्षित है। इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी) के पूर्व अध्यक्ष और अग्रणी कास्टिंग निर्यातक राकेश शाह ने कहा कि भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 20-21 अरब डॉलर की है। इसमें से लगभग एक अरब डॉलर पश्चिम बंगाल से आता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के फाउंड्री-संबंधित उद्योग में 50,000 से एक लाख नौकरियां इस व्यापार से जुड़ी हैं।