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कहीं अमेरिका पर ही भारी न पड़ जाए टैरिफ: विश्लेषकों की राय, ट्रंप के रवैये से बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Sat, 09 Aug 2025 09:37 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन/लंदन।

सार

अमेरिका की टैरिफ नीतियां लगातार सुर्खियों में हैं। हालांकि, अब विश्लेषकों इस बात से आशंकित हैं कि कहीं अमेरिका पर ही टैरिफ भारी न पड़ जाए। विश्लेषकों की राय में ट्रंप के रवैये के कारण इनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तेल खरीदारों पर अतिरिक्त शुल्क से वैश्विक कीमतें भी बढ़ सकती हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों से पुतिन के तेवर बदलने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के समकक्ष व्लादिमीर पुतिन और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर जुर्माने से लेकर दर्द निवारक दवा का बेजा इस्तेमाल रोकने के लिए फेंटेनाइल के आयात पर रोक लगाने तक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को अपनी विदेश नीति का पसंदीदा हथियार बना लिया है। भारी-भरकम टैरिफ लगातार दुनियाभर के बाजारों में हलचल मचा देने वाले ट्रंप अब इसी के बलबूते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को घुटनों पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इससे पुतिन के तेवरों में कोई कमी आने के आसार नहीं हैं।

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ट्रंप ने रूस को धमकाने के लिए एकदम नायाब तरीका निकाला है। उन्होंने रूस से कहा है कि या तो वह एक दिन के भीतर यूक्रेन के साथ जंग रोके या फिर उसका तेल खरीदने वाले देशों पर द्वितीयक टैरिफ के तौर पर जुर्माना लगाए जाने के लिए तैयार रहे। ट्रंप का मानना है कि द्वितीयक शुल्क (भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ की तरह) से बचने के लिए संबंधित देश रूस से कच्चा तेल आयात करना बंद कर देंगे। इससे एक प्रमुख वित्तीय स्रोत बंद होने से रूस के लिए जंग लड़ना मुश्किल हो जाएगा। जाहिर है, अमेरिका का यह कदम रूस की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ट्रंप के लिए भी आर्थिक और राजनीतिक मुश्किलें बढ़ने के पूरे आसार हैं। पुतिन ने भले ही ट्रंप के साथ मुलाकात पर हामी भर दी हो, लेकिन उनके रवैये से परिचित विश्लेषकों का अनुमान है कि रूसी राष्ट्रपति धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं। रूस मामलों के पूर्व अमेरिकी खुफिया विश्लेषक और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के रूस और यूरेशिया कार्यक्रम के निदेशक यूजीन रूमर का कहना है कि ऐसी धमकियों के कारण पुतिन के युद्धविराम पर सहमत होने की संभावना लगभग शून्य है।

मध्यावधि चुनाव, व्यापार वार्ताओं पर असर संभव
विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप के टैरिफ की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके असर से अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा और इसका असर अगले साल होने वाले अमेरिकी मध्यावधि कांग्रेस चुनावों पर भी नजर आ सकता है। यूजीन रूमर कहते हैं कि यह मुद्दा ट्रंप के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी करने वाला भी साबित हो सकता है।
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अमेरिकी धमकी की कीमत चुकाने को पुतिन तैयार
यूजीन रूमर कहते हैं, सैद्धांतिक तौर पर यदि भारत व चीन तेल खरीद बंद कर दें, तो रूसी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। हालांकि ऐसा नहीं होने वाला है। पुतिन पहले ही इस तरह के संकेत दे चुके हैं कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों की तरफ से थोपी जाने वाली किसी भी नई आर्थिक चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।

भारत, चीन के साथ बढ़ेगा गतिरोध
विश्लेषकों की मानें तो ट्रंप का टैरिफ को हथियार बनाने का दांव उन पर ही भारी पड़ सकता है, क्योंकि इससे चीन व भारत के साथ व्यापार समझौते सुनिश्चित करने के अमेरिकी प्रशासन के प्रयासों को भी झटका लग सकता है। पूर्व अमेरिकी वित्तीय अधिकारी किम्बर्ली डोनोवन ने कहा कि ये टैरिफ भारत और चीन के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो-टूक कह चुके हैं कि चाहे जो कीमत चुकानी पड़े, भारतीय किसानों-पशुपालकों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यही नहीं, चीन भी साफ कर चुका है कि रूस से तेल खरीदना बंद करने वाला नहीं है।

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