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ट्रंप की पाबंदियों का उलटा असर: चीन में अमेरिका की एआई चिप का दबदबा खत्म, एनवीडिया हुवावे से कैसे पिछड़ गया?

Mon, 29 Jun 2026 08:16 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या अमेरिकी पाबंदियों ने चीन में चिप डिजाइन करने वाली कंपनी एनवीडिया का बाजार खत्म कर दिया है? जानिए कैसे हुवावे ने एआई चिप मार्केट में अपनी बादशाहत कायम की है। टेक और बिजनेस जुड़ी यह पूरी खबर अभी पढ़ें।
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एनवीडिया - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक की दौड़ में अमेरिका और चीन के बीच की जंग एक नया मोड़ ले चुकी है। राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अमेरिका ने चीन पर जो तकनीकी पाबंदियां लगाई थीं, वे अब उसी की दिग्गज कंपनियों पर भारी पड़ रही हैं। अमेरिकी चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया चीन के एआई चिप बाजार में अपना दबदबा खो रही है, जबकि इसकी जगह हुवावे जैसी चीन की घरेलू कंपनियों ने ले ली है। यह बदलाव न केवल सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अहम है, बल्कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन की नई हकीकत भी बयां करता है।

अमेरिकी पाबंदियों से एनवीडिया को कितना बड़ा नुकसान हुआ?

किसी समय चीन के बाजार में एनवीडिया का एकछत्र राज हुआ करता था। कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग ने खुद स्वीकार किया है कि अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों से पहले चीन में उनकी कंपनी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 95% थी। लेकिन पाबंदियों के बाद हालात तेजी से बदले हैं।

  • ग्लोबल रिसर्च फर्म बर्नस्टीन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चीन के एआई चिप बाजार में एनवीडिया की हिस्सेदारी 40% रह गई थी, जो हुवावे के लगभग बराबर थी। 
  • अनुमान है कि इस साल एनवीडिया का मार्केट शेयर सिकुड़कर सिर्फ आठ प्रतिशत रह जाएगा, जबकि हुवावे बढ़कर लगभग 50% पर कब्जा जमा लेगी।

कंपनी के मुखिया हुआंग ने माना है कि अमेरिका ने अपनी बढ़त खो दी है और चीनी प्रतिद्वंद्वी अब दिग्गज बन गए हैं।

हुवावे ने इस मौके का फायदा कैसे उठाया?

साल 2019 में जब अमेरिका ने हुवावे और बाद में चीन को शक्तिशाली कंप्यूटर चिप्स खरीदने से रोका, तो चीनी कंपनियों ने आत्मनिर्भर होने की मुहिम तेज कर दी। 

  • हुवावे की सबसे उन्नत कमर्शियल एआई चिप 'एसेंड 950' सीरीज को एनवीडिया की ताकतवर एच200 चिप के लगभग बराबर माना जा रहा है।
  • चीन की तेजी से उभरती एआई कंपनी 'डीपसीक' ने भी अपना 'वी4 एआई मॉडल' पेश किया है, जिसे हुवावे की उन्नत एसेंड चिप्स के लिए ही अनुकूल बनाया गया है।

मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज की एंटोनिया हमाइदी का कहना है कि एनवीडिया ने निश्चित रूप से हुवावे के सामने अपनी जमीन खो दी है, चीन की घरेलू कंपनी अब बाजार का नेतृत्व कर रही है।

क्या चीन अब एआई चिप निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है?

हालांकि चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन वैश्विक है और कोई भी देश अकेले उन्नत एआई चिप नहीं बना सकता। 

  • चीन को अभी भी डीपसीक जैसे बड़े एआई मॉडल्स की ट्रेनिंग के लिए एनवीडिया की चिप्स की जरूरत पड़ती है। 
  • एनवीडिया अपनी चिप्स बनाने के लिए डच कंपनी एएसएमएल की अत्याधुनिक मशीनों और ताइवान की टीएसएमसी पर निर्भर है। अमेरिका ने चीन को एएसएमएल की ये मशीनें खरीदने से रोक दिया है।

एनवीडिया ने अमेरिकी नियमों के दायरे में रहकर चीन को एच20 नामक कम क्षमता वाली चिप बेचने की कोशिश की थी, लेकिन इसकी बिक्री में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, शक्तिशाली 'एच200' चिप्स से अभी तक चीन में कोई रेवेन्यू नहीं मिला है।

आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है?

यह साफ है कि अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों ने अनजाने में चीन की स्वदेशी चिप इंडस्ट्री को मजबूत कर दिया है। ओम्डिया के रिसर्च डायरेक्टर हे हुई के मुताबिक, "चीन अब अपनी आत्मनिर्भरता और आपूर्ति क्षमताओं पर पूरी तरह विश्वास करता है"। भले ही वैश्विक स्तर पर एनवीडिया का सालाना रेवेन्यू (लगभग 216 अरब डॉलर) हुआवे (126 अरब डॉलर) से कहीं आगे है, लेकिन चीनी बाजार में एनवीडिया के लिए वापसी करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले समय में तकनीकी आत्मनिर्भरता की इस नीति के चलते हुवावे न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया जैसे वैश्विक बाजारों में भी चिप सप्लाई का एक मजबूत दावेदार बन सकती है।

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