अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक स्वर्ण युग के सभी वादों के बावजूद इस सप्ताह के अमेरिकी वित्तीय आंकड़े चेतावनी भरे संकेत दे रहे हैं। वित्तीय संकेतकों की बाढ़ ने संभावित रूप से चिंताजनक कहानी बयां की है। रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं और मुद्रास्फीति बढ़ रही है। पिछले साल की तुलना में विकास दर धीमी हो गई है।
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ट्रंप अपने अनुसार व्यवस्था को बदल रहें
अपने कार्यकाल के छह महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद, ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाने और उनके नए कर एवं व्यय विधेयक ने बहुत से बदलाव लाए। उन्होंने अमेरिका की व्यापार, विनिर्माण, ऊर्जा और कर प्रणालियों को अपनी पसंद के अनुसार बदल दिया है। साथ ही वे किसी भी संभावित जीत का श्रेय लेने के लिए उत्सुक हैं और अगर वित्तीय स्थिति डगमगाने लगे तो किसी और दोष देने से पीछे नहीं हटते।
अपना दोष दूसरे पर डालने से पीछे नहीं हटते ट्रंप
हालांकि अभी तक वह गति नहीं दिखाई दी है, जिसका वादा रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने किया था। इसके अलावा किसी भी आर्थिक चुनौती के लिए वे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को देषी ठहराने की उनकी क्षमता फीकी पड़ गई है।
ट्रंप ने चेतानियों को नजरअंदाज किया
शुक्रवार की नौकरियों की रिपोर्ट निराशाजनक निकली फिर भी ट्रंप ने आंकड़ों मे दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। साथ ही उन्होंने नोकरियों के आंकड़े तैयार करने वाली एजेंसी के प्रमुख को बर्खास्त कर दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने दावे के पक्ष में कोई सबूत दिए बिना कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण आंकड़े निष्पक्ष और सटीक होने चाहिए। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इनमें हेरफेर नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।
राजनीतिक जोखिम पैदा होने की संभावना
पिछले सप्ताह के अमेरिकी आर्थिक आंकड़े दर्शाते हैं कि अगर आंकड़े इसी तरह चलते रहे तो ट्रंप को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा सकता है। ट्रंप अगर मध्यम वर्ग को समृद्धि प्रदान करने में असमर्थ रहते हैं, तो टैरिफ कार्यकारी कार्रवाईयों, खर्च में कटौती और कर संहित में बदलावों का उनका आक्रमक इस्तेमाल एक बड़ा राजनीतिक जोखिम पैदा करता है।
पूर्व राष्ट्रपति ने भी दी थी चेतावनी
बेशक, ट्रम्प यह नहीं कह सकते हैं कि किसी ने उन्हें उनकी आर्थिक नीतियों के संभावित परिणामों के बारे में चेतावनी नहीं दी थी। पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन ने पिछले दिसंबर में ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में दिए गए भाषण में यही कहा था कि टैरिफ की लागत अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों को प्रभावित करेगी।
बाइडेन ने कहा था कि ऐसा लगता है कि वह इस देश में आयातित सभी वस्तुओं पर भारी, सार्वभौमिक शुल्क लगाने पर अड़े हुए हैं। इस गलत धारणा के साथ कि इन शुल्कों का खर्च अमेरिकी उपभोक्ताओं के बजाय विदेशी देश उठाएंगे। उन्होंने मानना है कि यह दृष्टिकोण एक बड़ी गलती है।