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Adani Case: गौतम और सागर अदाणी पर अमेरिका में लगे सभी आपराधिक केस खारिज, जानिए इस मामले से जुड़ी पूरी टाइमलाइन

Tue, 11 Aug 2026 08:54 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ लगे सभी आपराधिक आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जानें इस मामले से जुड़ी पूरी टाइमलाइन और दिग्गज भारतीय वकीलों की इस पर प्रतिक्रिया।
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गौतम अदाणी - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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अदाणी ग्रुप के लिए वैश्विक स्तर पर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला 'विथ प्रेजुडिस' सुनाया है, जिसका सीधा और साफ मतलब यह है कि अब भविष्य में इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर उनके खिलाफ दोबारा कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा। इस फैसले ने करीब दो साल से चले आ रहे इस हाई-प्रोफाइल विवाद का पूरी तरह से पटाक्षेप कर दिया है।

अमेरिकी कोर्ट ने यह बड़ा फैसला क्यों सुनाया और किस जज ने आदेश दिया?

न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने इस मामले को खारिज करने का अंतिम आदेश दिया है। दरअसल, खुद अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने अदालत से अनुरोध किया था कि इन आपराधिक आरोपों को पूरी तरह से हटा दिया जाए। न्याय विभाग ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए समीक्षा के बाद यह पाया कि कथित रिश्वतखोरी का कोई भी लेन-देन अमेरिकी जमीन पर नहीं हुआ था और इस मुकदमे पर आगे और सरकारी संसाधन खर्च करना ठीक नहीं है। कोर्ट ने विभाग के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए केस को बंद कर दिया।

इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत से लेकर अंतिम फैसले तक की पूरी टाइमलाइन इस प्रकार है:

नवंबर 2024 - अगस्त 2026

1. नवंबर 2024: अमेरिकी कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल

  • क्या हुआ: अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य लोगों के खिलाफ एक औपचारिक आरोप पत्र दायर किया।
  • आरोप: इन सभी पर भारत में सौर ऊर्जा अनुबंधों को हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
  • प्रतिक्रिया: अदाणी समूह और आरोपी व्यक्तियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

2. मई 2026: अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) का यू-टर्न

  • क्या हुआ: मामले की आंतरिक समीक्षा के बाद, अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मुकदमे में एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया।
  • वजह: विभाग ने अपने 'अभियोजन विवेकाधिकार' का इस्तेमाल करते हुए अदालत को बताया कि वे इस आपराधिक मामले पर आगे और सरकारी संसाधन खर्च नहीं करना चाहते हैं और आरोपों को वापस लेना चाहते हैं।

3. मध्य 2026: अमेरिकी कोर्ट की सख्त जांच और स्पष्टीकरण की मांग

  • क्या हुआ: अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने न्याय विभाग के इस अनुरोध को तुरंत स्वीकार नहीं किया।
  • वजह: जज ने विभाग द्वारा मामले को वापस लेने के पीछे दिए गए शुरुआती तर्कों पर सवाल उठाए और न्याय विभाग को निर्देश दिया कि वे इस फैसले के समर्थन में अधिक विस्तृत और ठोस स्पष्टीकरण  प्रस्तुत करें।

4. 11 अगस्त 2026: मामला हमेशा के लिए खारिज 

  • क्या हुआ: पूर्वी जिला न्यूयॉर्क के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने सभी आपराधिक आरोपों को 'विथ प्रेजुडिस'  खारिज कर दिया।
  • महत्व: इस कानूनी शब्दावली का मतलब यह है कि अब भविष्य में अमेरिकी सरकार इन्हीं आरोपों के आधार पर दोबारा मुकदमा नहीं चला सकती है। इसके साथ ही यह आपराधिक मामला पूरी तरह से और हमेशा के लिए बंद हो गया है।
  • गौतम अदाणी की प्रतिक्रिया: गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय का स्वागत करते हुए लिखा कि वे न्यायपालिका की प्रक्रिया के प्रति गहरी विनम्रता और सम्मान के साथ इस फैसले का स्वागत करते हैं।

वरिष्ठ वकीलों का इस फैसले पर क्या कहना है?

  • वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने इस फैसले को बिल्कुल अपेक्षित बताया और कहा कि इस मुकदमे का शुरू से कोई आधार नहीं था, यह केवल अडानी समूह के खिलाफ एक 'विचहंट' की तरह था।
  • वरिष्ठ वकील विकास सिंह के अनुसार, अमेरिकी सरकार द्वारा खुद केस वापस लेने और कोर्ट की मंजूरी के बाद अब अमेरिका में इस आपराधिक मामले में कुछ भी शेष नहीं बचा है।
  • वरिष्ठ वकील विकास पाहवा ने इसे अदाणी समूह के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण राहत बताया, जिसने 2024 के बाद से हुए छवि के भारी नुकसान और नकारात्मक प्रचार को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
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