शहरों में बेरोजगार लोगों की तादाद में लगातार इजाफा हो रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहरों में बेरोजगारी दर चार माह के शीर्ष पर पहुंच चुकी है। सीएमआईई की हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
9.1 फीसदी पर पहुंची शहरी बेरोजगारी
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 18 दिसंबर को शहरी बेरोजगारी दर 9.1 प्रतिशत रही थी, जो अगस्त के बाद सबसे अधिक अधिक आंकड़ा है। 17 दिसंबर को अखिल भारतीय बेरोजगारी दर 7.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जो नवंबर में 7 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। ग्रामीण बेरोजगारी दर नवंबर में 6.44 प्रतिशत की तुलना में 6.9 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाला है।
सबसे ज्यादा बेराजगारी हरियाणा में
गौरतलब है कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई), जो मालिकाना उपकरणों के साथ श्रम बाजार पर नजर रखता है, ने दिखाया कि 29.3 प्रतिशत के साथ हरियाणा बेरोजगारी में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शीर्ष पर है। इसके बाद जम्मू और कश्मीर 21.4 प्रतिशत के साथ दूसरे, जबकि 20.4 प्रतिशत के साथ राजस्थान तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा बिहार (14.8 फीसदी), हिमाचल प्रदेश (13.6 फीसदी), त्रिपुरा (13.4 फीसदी), गोवा (12.7 फीसदी) और झारखंड (11.2 फीसदी) उन राज्यों में शामिल हैं, जहां दिसंबर में बेरोजगारी दहाई अंक में है। दिल्ली में बेरोजगारी दर 9.3 फीसदी दर्ज की गई है।
देश की सकल बेरोजगारी दर के आंकड़े
| महीना |
बेरोजगारी दर |
| दिसंबर |
7.6 प्रतिशत |
| नवंबर |
7 प्रतिशत
|
| अक्तूबर |
7.75 प्रतिशत |
| सितंबर |
6.86 प्रतिशत |
| अगस्त |
8.32 प्रतिशत |
| जुलाई |
6.96 प्रतिशत |
| जून |
9.17 प्रतिशत |
| मई |
11.84 प्रतिशत |
शहरी बेरोजगारी दर पर एक नजर
| महीना |
बेरोजगारी दर |
| दिसंबर |
9.1 प्रतिशत |
| नवंबर |
8.21 प्रतिशत |
| अक्तूबर |
7.38 प्रतिशत |
| सितंबर |
8.62 प्रतिशत |
| अगस्त |
9.78 प्रतिशत |
| जुलाई |
8.32 प्रतिशत |
| जून |
10.08 प्रतिशत |
| मई |
14.72 प्रतिशत |
एलपीआर में आई गिरावट
ग्रामीण बेरोजगारी दर अक्तूबर में 7.91 फीसदी, सितंबर में 6.06 फीसदी, अगस्त में 7.64 फीसदी, जुलाई में 6.34 फीसदी, जून में 8.75 फीसदी और मई में 10.55 फीसदी रही। सीएमआईई के अनुसार, नवंबर के आंकड़ों से पता चलता है कि श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) फिसल गई है। अक्तूबर के 40.41 फीसदी की तुलना में गिरकर नवंबर में यह 40.15 फीसदी पर आ गया। एलपीआर में गिरावट का यह लगातार दूसरा महीना है। संचयी रूप से, एलपीआर अक्तूबर और नवंबर 2021 में 0.51 प्रतिशत अंक गिर गया है। अगर हम लॉकडाउन जैसे आर्थिक झटके के महीनों को बाहर करते हैं तो अन्य महीनों में देखे गए औसत परिवर्तनों की तुलना में यह एलपीआर में एक महत्वपूर्ण गिरावट बनाता है।