वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नरेंद्र मोदी सरकार के 100 दिन का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कहा कि जीडीपी में उतार-चढ़ाव विकास प्रक्रिया का हिस्सा है। केंद्र सरकार देश में व्याप्त आर्थिक सुस्ती को खत्म करने के लिए प्रयास कर रही है, और विकास दर बढ़ाने के लिए उपाय शुरू कर दिए गए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा है कि सरकार ऑटो सेक्टर में व्याप्त सुस्ती को लेकर के गंभीर है। इसके साथ ही ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री की मांगों पर भी गौर किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार घर खरीदारों की मांगों पर अपनी तरफ से हल खोज रही है, जिसके बारे में जल्द ही जानकारी दी जाएगी। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि शहरों में गाड़ियां की बिक्री इसलिए प्रभावित हो रही है क्योंकि एक तरफ बीएस6 और दूसरी तरफ ओला-उबर से आना-जाना शामिल हैं।
सरकार जीएसटी संग्रह बढ़ाने के लिए अपनी तरफ से सारी कोशिश कर रही है। जीएसटी संग्रह अधिकतम एक लाख करोड़ रुपये के पार गया है। हालांकि ज्यादातर समय यह इससे नीचे रहा है। अब सरकार टैक्स का दायरा बढ़ाने की बात कह रही है।
बैंक विलय पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकों के विलय की तारीख तय करने का अधिकार इनके बोर्ड के पास है। इस तारीख को तय करने में सरकार का किसी तरह का कोई दखल नहीं होगा। बैंक के बोर्ड ही इस बारे में फैसला लेंगे। फिलहाल सरकार ग्राहकों का विश्वास बढ़ाने के तरीकों पर कार्य कर रही है।