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RINL: राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड को केंद्र ने दी वित्तीय मदद, जानें किन संकटों से घिरी है ये सरकारी कंपनी

Sun, 03 Nov 2024 12:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की स्टील उत्पादन कंपनी है। इसके पास आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 75 लाख टन का प्लांट है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों से यह कंपनी कई वित्तीय और परिचालन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। 
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इस्पात उत्पादन - फोटो : istock
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINIL) को 1650 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी है। एक आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, परिचालन  और आर्थिक संकट से जूझ रही इस सरकारी कंपनी पर कर्ज लगातार बढ़ा है। ऐसे में संकट को खत्म करने के लिए अब केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने कदम बढ़ाया है। 
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मंत्रालय ने कहा कि वह आरआईएनएल को चलाने के लिए कई कदम उठा रहा है। सरकार ने बताया कि उसने 19 सितंबर 2024 को इक्विटी के तौर पर आरआईएनआईएल में 500 करोड़ रुपये की मदद दी है। वहीं 27 सितंबर 2024 को उसने वर्किंग कैपिटल लोन को तौर पर उसे 1140 करोड़ रुपये दिए हैं।

सरकार के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के मालिकाना हक वाली एसबीआईकैप्स (SBICAPS) से आरआईएनएल की वहनीयता को लेकर रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी कहा गया है। इस दस्तावेज में इसका भी जिक्र किया गया है कि आरआईएनएल गंभीर वित्तीय संकट में है और इस्पात मंत्रालय इस चिंता के निपटारे के लिए वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है। 
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क्या है राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड?
गौरतलब है कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की स्टील उत्पादन कंपनी है। इसके पास आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 75 लाख टन का प्लांट है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों से यह कंपनी कई वित्तीय और परिचालन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। 

इसके तीन में से दो ब्लास्ट फर्नेस (भट्टियों) को पहले अक्तूबर 2028 तक के लिए बंद कर दिया गया था। इसके चलते आरआईएनएल पर कर्ज 35 हजार करोड़ तक बढ़ गया है। 

कंपनी के निजीकरण को मिल चुकी है सैद्धांतिक मंजूरी
इससे पहले जनवरी, 2021 में कैबिनेट की आर्थिक मामलों की कमेटी (सीसीईए) ने रणनीतिक विनिवेश के जरिए आरआईएनएल में सरकारी हिस्सेदारी के 100 प्रतिशत विनिवेश के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। हालांकि, कंपनी के निजीकरण के सरकार के फैसले का श्रमिक संघों ने विरोध किया था। उनका कहना था कि आरआईएनएल के पास खुद के इस्तेमाल वाली लौह अयस्क खानें नहीं है। इसके चलते उसे मौजूदा संकट झेलना पड़ रहा है।

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