दरअसल अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए देश की सालाना विकास दर में 7-8 फीसदी की गिरावट रहने का आकलन पेश किया है। यह विकासशील देशों के बीच सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। सरकार के सामने अर्थव्यवस्था को गिरावट के इस गर्त से बाहर निकालने की सबसे बड़ी चुनौती है।
महामारी का असर कम होने के संकेत हैं और टीकाकरण कार्यक्रम में क्रमिक प्रगति से बेहतर भविष्य की आशा बढ़ी है। ऐसे समय पर सतत आर्थिक सुधार के लिए बेहतर नीति की जरूरत है, जो सरकार आगामी बजट में पूरा कर सकती है।
राजकोषीय घाटा कम करने के उपायों की जरूरत
31 मार्च को खत्म हो रहे वित्त वर्ष के दौरान सरकार के राजस्व में 60,000 करोड़ रुपये की कमी का आकलन किया जा रहा है। यह 3.5 फीसदी राजकोषीय घाटे के बजट लक्ष्य के मुकाबले 7 फीसदी से ज्यादा होगा। क्रेडिट एजेंसियों ने आगामी वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी राजकोषीय घाटे का अनुमान जारी किया है। सरकार से आम बजट में इस घाटे को कम करने के उपायों की उम्मीद रहेगी।
वित्त मंत्री दे चुकी हैं कुछ अनूठा करने के संकेत
वित्त मंत्री के तौर पर सीतारमण ने 2019 में चमड़े के ब्रीफकेस में बजट दस्तावेज पेश करने की दशकों से चली आ रही परंपरा को तोड़कर लाल कपड़े में लिपटे ‘बहीखाते’ में अपना पहला बजट पेश किया था। इस बार भी वह परंपरा से अलग कुछ अनूठा बजट पेश करने के संकेत दे चुकी हैं। उन्होंने जनवरी की शुरुआत में कहा था कि आगामी बजट ऐसा होगा, जो पहले कभी पेश नहीं किया गया।
सुलझानी होंगी पांच समस्याएं
- कोरोना महामारी से दिखाई दीं स्वास्थ्य ढांचे की कमियां
- बाजार में मांग को दोबारा बढ़ाने के उपायों की जरूरत
- अहम आर्थिक कड़ी यानी बैंकिंग सेक्टर में जरूरी सुधार
- राजकोष में आ रही गिरावट से बाहर निकलने पर जोर
- 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का तरीका
सिमटी है अर्थव्यवस्था
224 लाख करोड़ की थी पिछले बजट के समय अर्थव्यवस्था
194 लाख करोड़ पर आ चुका है अब तक आकार सिमटकर
खर्च के दो बड़े क्षेत्र
- 111 लाख करोड़ के 5 साल में निवेश अनुमान वाला नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन कार्यक्रम
- 26 अरब डॉलर की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को विदेशी उत्पादकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाना
पिछले बजट में...
| क्षेत्र |
आवंटन |
बदलाव |
| रक्षा |
4.71 लाख करोड़ |
9.37 % |
| स्वास्थ्य |
67,112 करोड़ |
3.9 % |
| इंफ्रास्ट्रक्चर |
1.7 लाख करोड़ |
7.2 % |
(बदलाव : वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले)
कोरोना महामारी के बीच सोमवार को पेश होने जा रहे आम बजट में सरकार को अधिकतम ध्यान स्वास्थ्य क्षेत्र पर केंद्रित होगा। यह उम्मीद एक सर्वे में शामिल होने वाले 39.7 फीसदी लोगों ने जताई है।
आम बजट से पहले एसोचैम-प्राइमस पार्टनर्स की तरफ से कराए गए सर्वे में उद्योग जगत के 550 लोगों से बातचीत की गई और इनमें से 39.7 फीसदी ने कहा कि बजट में संसाधनों के आवंटन से लेकर नीतिगत सहयोग तक के लिहाज से स्वास्थ्य सेवाएं सर्वोच्च प्राथमिकता में रहेंगी।
हालांकि 67.3 फीसदी लोगों को लगता है कि सरकार मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को ही आधुनिक बनाने का प्रावधान करेगी, जबकि 62.9 फीसदी ने संभावना जताई कि सरकार नए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा ढांचे के निर्माण में निवेश बढ़ाएगी।
बजट में विनिर्माण क्षेत्र के दूसरा सबसे अहम सेक्टर रहने की उम्मीद है, जिस पर 14.7 फीसदी लोगों ने वित्त मंत्री की नजर-ए-इनायत होने की संभावना जताई है। इसके बाद एमएसएमई (11.4 फीसदी), रियल एस्टेट (10.7 फीसदी) और ढांचागत सुविधाएं (9.6 फीसदी) का नंबर आता है।